Saturday , May 9 2026

Articles

May, 2026

  • 8 May

    रवींद्र नाथ टैगोर

    क्रांतिकारी लेखक “रवीन्द्रनाथ टैगोर”   एक ऐसा व्यक्तित्व जो साहित्य जगत के लिए वरदान साबित हुआ। हम बात कर रहे हैं गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की। जिनका जन्म भारत के कलकत्ता में 7 मई 1861 को देवेन्द्रनाथ टैगोर और शारदा देवी के पुत्र के रूप हुआ में हुआ था। वो अपने …

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  • 6 May

    दिगंबर जैन मंदिर का भूमि पूजन व शिलान्यास

    *हिन्दमोटर में दिगंबर जैन मंदिर का भूमि पूजन व शिलान्यास संपन्न*   तीन दिवसीय आयोजन में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब हिन्दमोटर, 5 मई। हिन्दमोटर दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर निर्माण हेतु 1 से 3 मई 2026 तक भूमि पूजन एवं शिलान्यास समारोह …

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  • 6 May

    भाजपा की एक अकल्पनीय विजय

    आखिर कैसे आए ये चुनाव परिणाम   पांच राज्यों के चुनाव परिणामों पर कोई एक सुसंबद्ध टिप्पणी संपूर्ण स्थितियों का विश्लेषण नहीं कर सकता। किंतु सबको मिलाकर एक तस्वीर बनाएं तो इसमें दो ऐतिहासिक युगांतरकारी परिणतियां हैं। एक , पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐसी विजय जो एक समय अकल्पनीय …

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  • 6 May

              मां: इक याद

    अन्तर्राष्ट्रीय मातृ दिवस  (10 मई 2026) के अवसर पर मेरी मां, अभी मैं पढ़ता ही था कि तुम मुझे छोड़ कर चली गई तुम्हारी आंखों में मेरे लिए कई-कई सपने थे पर उन सपनों ने अभी सच होने के लिए जागना था  पर तुम तो पहले ही सो गई क्या …

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  • 2 May

    ‘नव दुर्गा नव रूप’ का लोकार्पण’

    भारतीय भाषा परिषद में जैन महिला मंडल द्वारा डॉ वसुंधरा मिश्र की कथा काव्यसंग्रह ‘नव दुर्गा नव रूप’ का लोकार्पण – –   भारतीय भाषा परिषद के सभाकक्ष में लेखिका डॉ वसुंधरा मिश्र की कथा काव्यसंग्रह ‘नव दुर्गा नव रूप’ काव्य पुस्तक का लोकार्पण किया गया। यह कार्यक्रम जैन महिला …

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April, 2026

  • 30 April

    धरती धोरा री

    *पढ्यौ है पण गुण्यौ कोनी*   आज पोतौ दादी ने पूच्छ्यौ– दादीसा, लोग केवै पढ़्या लिख्या ग्यानी हुवै, पढ़्यै लिख्यै रै च्यार आंख्या हुवै फिर केई जणा मौकळी डिगरी धारियां ने पढ़्या लिख्या मूरख क्यूं बोलै। दादी बोली– पढ़्यै लिख्यै में गुण नहीं हुवै तो लोग गुण बायरौ ही समझै। …

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  • 30 April

    तेजाबी बरसात

    हां यहां तेजाबी बरसात है…     सावधान, रखना ध्यान यहां के मौसम का कुछ अलग ही मिजाज है कुचक्र चल रहा यहां अनगिनत चाल है भ्रष्ट तंत्र की जगह – जगह बिछी बिसात है हां यहां तेजाबी बरसात है।   किसी का दंभ दौड़ा किसी का बल बोला सच …

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