Wednesday , May 20 2026

Articles

May, 2026

  • 20 May

    बिना राम के इस भारत में भारतवर्ष कहां है

    अग्नि के गर्भ में पला होगा शब्द जो श्लोक में ढला होगा – डॉ  शिव ओम अंबर अपनी प्रखर लेखनी एवं ओजस्वी कविताओं के लिए विख्यात   शिव ओम अंबर के सानिध्य में एक काव्य संगोष्ठी का आयोजन ‘जन संसार’  कार्यालय में किया गया। कार्यक्रम का आरम्भ प्रणति ठाकुर ने सरस्वती  वंदना  …

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  • 20 May

    बांग्ला साहित्य में स्त्री प्रतिरोध और स्वतंत्र चेतना के स्वर

    शब्दभूमि प्रकाशन की राष्ट्रीय संगोष्ठी में डिजिटल युग की हिंदी लघुकथा पर व्यापक विमर्श       शब्दभूमि प्रकाशन की राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर के साहित्यकारों, शोधार्थियों और शिक्षकों ने रखे विचार शब्दभूमि प्रकाशन द्वारा ‘डिजिटल युग में हिंदी लघुकथा : संवेदना से स्क्रीन तक की यात्रा’ विषय पर राष्ट्रीय …

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  • 20 May

    सहो और बेहतर बात करने के लिए रहो ‘

    जालान पुस्तकालय में डॉ अम्बर का व्याख्यान सहो और बेहतर बात करने के लिए रहो ‘ कोलकाता 20 मई। सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय के तत्वावधान में हिंदी काव्य मंचों के रोचक प्रसंग विषयक अंतरंग गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में मंच संचालक के रूप में अपनी पचास वर्षीय …

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  • 20 May

    बंगाल में राजनीतिक हिंसा

    बंगाल में राजनीतिक हिंसा रोकना भाजपा सरकार की सबसे बड़ी चुनौती     पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार गठन के बाद उम्मीद बंधी है कि चुनाव उपरांत हिंसा नियंत्रित होगी। चार राज्यों एवं एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव हुए जिनमें तीन राज्यों पश्चिम बंगाल, केरल एवं तमिलनाडु में सत्तारूढ़ …

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  • 20 May

    “गुरु ग्रंथ साहिब में भगत जयदेव”

    गुरुग्रंथ साहिब में भगत जयदेव पर हुआ सेमिनार कोलकाता। पंजाबी साहित्य सभा कोलकाता तथा सिख रिसर्च इंस्टीट्यूट, अमेरिका के संयुक्त तत्वावधान में “गुरु ग्रंथ साहिब में भगत जयदेव” विषय पर खालसा इंग्लिश स्कूल के सभागार में एक सेमिनार का आयोजन किया, जिसमें भगत जयदेव के उन दो पदों का विस्तार …

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  • 20 May

    *जातिवाद से ऊपर उठकर राष्ट्र भाव जगायें

       आचार्य विष्णुकान्त शास्त्री स्मृति व्याख्यानमाला *जातिवाद से ऊपर उठकर राष्ट्र भाव जगायें : डॉ. शिवओम अम्बर* कोलकाता, 17 मई। “राष्ट्र को परम वैभव पर ले जाने के लिए हमें जातिवाद से ऊपर उठना होगा। हमारी संस्कृति में अन्तर्निहित पांच प्राण तत्व हमें समाज एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण के …

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  • 11 May

    *मेरी मां  नही गाती  थी*

    ” मेरी माँ नहीं गाती थी  “   मेरी मां  नही गाती  थी न लोरी न गीत  रहीम, रसखान, मीरा की प्रीत    जब देती थी थपकी  सुलाने   लग जाती थी गम को भुलाने      आंखों में होती अधूरे कामो  की पीर    तरकशी  तानो से रिसता हुआ नीर     घर के अभेदी चक्रव्यूह को तोड़ नही पाती    घुट कर रह जाती    औरजब टूट जाती थी आंसुओं के सैलाब में डूब जाती थी   छिपा लेती थी मेरे मासूम चेहरे को अपने चेहरे से   दृढ़ता से लड़ती थी लगे हुए पहरे  से     मेरी मां इस तरह मेरे सुनहरे भविष्य को बुनती थी बीमारियों को दर किनार कर मेरी खातिर जीती थी ।।   -शकुन त्रिवेदी   

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