Saturday , April 11 2026

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April, 2026

  • 11 April

    वोट नही तो शिकायत नही

    “वोट नहीं तो शिकायत कैसी” – प्रिया श्रीवास्तव भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इस लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव है – मतदान। हर पाँच साल में हमें यह अवसर मिलता है कि हम अपना प्रतिनिधि चुनें जो हमारे लिए नीतियां बनाए और देश चलाए। मतलब हमारा एक …

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  • 11 April

    अनिश्चय के भवर में युद्ध विराम

    अनिश्चय के भंवर में युद्धविराम का भविष्य     कुल 932 घंटे 35 मिनट यानी 40 दिनों के युद्ध में खरबों की क्षति के बाद खाड़ी में अस्थायी दो सप्ताह के संघर्ष विराम की घोषणा हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद ईरान ने भी इसे …

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  • 11 April

    ‘उजालों के बदलते रंग’

    उजालों के बदलते रंग का लोकार्पण  सफर कैसे भी करे संघर्ष निश्चित है – डॉ रजनी साव   बैंगलोर से आयी डाक्टर राजनी साव के काव्य संग्रह ” उजालों के बदलते रंग”  का लोकार्पण सदीनामा के तत्वाधान में कोलकाता शहर के नामचीन लोगों  की उपस्थिति में  किया गया. इस कार्यक्रम  के  …

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  • 10 April

    सोदपुर गौशाला का भ्रमण

    रेलवे अधिकारियों ने किया सोदपुर गौशाला का भ्रमण   कोलकाता, 10 अप्रैल। इस्टर्न रेलवे के प्रधान मुख्य सुरक्षा अधिकारी श्री राम बहादुर राय ने अपनी पूरी टीम के साथ सोदपुर गौशाला में गोपूजा का विशेष कार्यक्रम किया। उस दिन सियालदाह विभाग सुरक्षा अधिकारी श्री सुजीत कुमार सिन्हा, उप सुरक्षा अधिकारी …

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  • 10 April

    आया प्रथम बैसाख, नव वर्ष का उजियारा

    *प्रथम बैसाख : नव वर्ष का गान       आया प्रथम बैसाख, नव वर्ष का उजियारा, बंग-धरा पर फैला देखो, खुशियों का नज़ारा। ढाक की थाप गूंजे, मन हो जाता चंचल, हर आंगन में खिल उठता, ये उत्सव निर्मल।  रवीन्द्र संगीत के सुनो,गूंज उठे स्वर, “एसो हे बईशाख” ने …

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  • 9 April

    खालसा सिरजना दिवस में तब्दील हुआ बैसाखी पर्व 

    14 अप्रैल 2026/ बैसाखी पर्व  विशेष  खालसा सिरजना दिवस में तब्दील हुआ बैसाखी पर्व हमारे देश में दिल्ली के तख़्त पर मुगलिया सल्तनत का शासन लगभग 300 सालों का रहा है ,बाबर से लेकर औरंगजेब और फिर बहादुर शाह द्वितीय तक और सिख गुरु की परंपरा भी गुरु नानक देव …

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  • 7 April

    घर आंगन की खुशबू

    घर आंगन की खुशबू घर आंगन की खुशबू फिर भी दुत्कारी ऑफिस से घर , घर से बाहर ये भी जिम्मेदारी भाग दौड़ के जीवन में भूली अपनी माहवारी मेरा घर मेरा आंगन हर पल इस पर वारी। कही छल रही खुद को खुद से आधुनिकता की मारी तोड़ दिए …

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