Friday , September 18 2026

Literature

कुमार शाश्वत को राजेंद्र यादव हंस पुरस्कार

हिन्दी लेखक कुमार शाश्वत को मिला राजेंद्र यादव ‘हंस’ अनुवाद पुरस्कार दिल्ली/कोलकाता।हिंदी लेखक कुमार शाश्वत को राजेंद्र यादव ‘हंस’ पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया । यह पुरस्कार उन्हें बांग्ला लेखक श्यामल भट्टाचार्य की मूल बांग्ला कहानी ‘चेची’ के अनुवाद के लिए दिया गया। ‘हिंदी साहित्य का ऑस्कर’ कहे जाने …

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“फ्रेम के बाहर” काव्य संग्रह का लोकार्पण

सदीनामा एवं गीतेश शर्मा फाउंडेशन के तत्वाधान में “फ्रेम के बाहर” काव्य संग्रह का लोकार्पण हुआ कोलकाता 21 अगस्त 26, सदीनामा एवं गीतेश शर्मा फाउंडेशन के तत्वाधान में ” फ्रेम के बाहर ‘ काव्य संग्रह का लोकार्पण हुआ। स्वागत किया कुसुम जैन ने । इस लोकार्पण के समय अवसर पर …

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दोस्ती का दीप

अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस (2 अगस्त) के अवसर पर दोस्ती का दीप       सुलगती हुई सरहदें पूछ रही हैं, कब ख़त्म होगी नफ़रत की रात? कब धरती के कोने-कोने में ही गूँज उठेगी मधुर प्रेम की  बात?   तोपों से कभी अमन नहीं उग सकता, और न तलवारें फूल …

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“नाम है आजाद”

आजाद मात्र शब्द नहीं आजाद मात्र शब्द नहीं, आजाद अक्षर संयोग नहीं। आजाद स्वर का संगीत नहीं, आजाद केवल विचार नहीं!! आजाद पराक्रम की प्रतिज्ञा, आजाद विकल्पहीन संकल्प। आ – आक्रमक अहं, स्व-शाश्वत, जा – जाग्रत जीव, परतंत्रता पर प्रहार!! जन्म और संकल्प- यज्ञ-अनुष्ठान स्वतंत्रता का, संस्कार बना उत्तर प्रदेश। …

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पंडित विद्यानिवास मिश्र के चिंतन में लोक संस्कृति

*विद्यानिवास मिश्र भारतीय संस्कृति के सशक्त वाहक थे : प्रो. गिरीश्वर मिश्र*   कोलकाता 12 जुलाई । सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय के तत्तवावधान में शनिवार को पंडित विद्यानिवास मिश्र की जन्मशती के अवसर पर पुस्तकालय सभागार में “विद्यानिवास मिश्र के लेखन में संस्कृति विमर्श” विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। …

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लघुकथा प्रतियोगिता

लघुकथा शोध केन्द्र तथा रचनाकार ने आयोजित की लघुकथा प्रतियोगिता     ‘लघुकथा शोध केन्द्र, भोपाल की  कोलकाता इकाई’ जिसे अन्तर्राष्ट्रीय संस्था रचनाकार संचालित करती है द्वारा स्योना एक्सपीरियंस कैफे में एक लघुकथा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें कोलकाता के अनेक स्थापित एवं नवांकुर लघुकथाकारों ने भाग लिया। ‘लघुकथा …

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बिना राम के इस भारत में भारतवर्ष कहां है

अग्नि के गर्भ में पला होगा शब्द जो श्लोक में ढला होगा – डॉ  शिव ओम अंबर अपनी प्रखर लेखनी एवं ओजस्वी कविताओं के लिए विख्यात   शिव ओम अंबर के सानिध्य में एक काव्य संगोष्ठी का आयोजन ‘जन संसार’  कार्यालय में किया गया। कार्यक्रम का आरम्भ प्रणति ठाकुर ने सरस्वती  वंदना  …

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*मेरी मां  नही गाती  थी*

” मेरी माँ नहीं गाती थी  “   मेरी मां  नही गाती  थी न लोरी न गीत  रहीम, रसखान, मीरा की प्रीत    जब देती थी थपकी  सुलाने   लग जाती थी गम को भुलाने      आंखों में होती अधूरे कामो  की पीर    तरकशी  तानो से रिसता हुआ नीर     घर के अभेदी चक्रव्यूह को तोड़ नही पाती    घुट कर रह जाती    औरजब टूट जाती थी आंसुओं के सैलाब में डूब जाती थी   छिपा लेती थी मेरे मासूम चेहरे को अपने चेहरे से   दृढ़ता से लड़ती थी लगे हुए पहरे  से     मेरी मां इस तरह मेरे सुनहरे भविष्य को बुनती थी बीमारियों को दर किनार कर मेरी खातिर जीती थी ।।   -शकुन त्रिवेदी   

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चाणक्य अभी भी जिंदा है

चाणक्य अभी भी जिंदा है         छिपा दिया इतिहास तुम्हारा तो क्या गीदड़ बन जाओगे बर्बरता के भय से क्या बिल में घुस जाओगे स्वाभिमान को गिरवी रख कर कैसे  जी पाओगे  बहु -बेटियों की लुटती इज्जत कब तक सह पाओगे।      सुप्त पड़ी पौरुष ज्वाल …

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आया प्रथम बैसाख, नव वर्ष का उजियारा

*प्रथम बैसाख : नव वर्ष का गान       आया प्रथम बैसाख, नव वर्ष का उजियारा, बंग-धरा पर फैला देखो, खुशियों का नज़ारा। ढाक की थाप गूंजे, मन हो जाता चंचल, हर आंगन में खिल उठता, ये उत्सव निर्मल।  रवीन्द्र संगीत के सुनो,गूंज उठे स्वर, “एसो हे बईशाख” ने …

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