हां यहां तेजाबी बरसात है…


सावधान, रखना ध्यान
यहां के मौसम का कुछ अलग ही मिजाज है
कुचक्र चल रहा यहां अनगिनत चाल है
भ्रष्ट तंत्र की जगह – जगह बिछी बिसात है
हां यहां तेजाबी बरसात है।
किसी का दंभ दौड़ा किसी का बल बोला
सच को रौंदने हज़ारों की कतार है
न जानें कैसे कैसे आरोपों की बहार है
निर्दोषों के ऊपर लाठियों का प्रहार है
हां यहां तेजाबी बरसात है।
अल्पज्ञान कोठरों में बढ़ती तादाद है
हिंसा की हर समय होती वहां बात है
दूर -दूर तक टोलियां लगाए बैठी घात है
बिना जाने -समझे अंजामे वारदात है
हां यहां तेजाबी बरसात है।
हे धैर्यवान, सहिष्णु प्रधान
तुम्हारे इर्द गिर्द घूमते शातिर दिमाग है
अपनी सुरक्षा का रखना तुम्हे ख्याल है
अन्यथा हार और संहार है
क्योंकि यहां तेजाबी बरसात है..
–
शकुन त्रिवेदी
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