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बहु भाषी कवि सम्मेलन

रचनाकार ने आयोजित किया बहुभाषी कवि सम्मेलन

      बहुभाषी कवि सम्मेलन में शामिल बहुभाषी कवि व अन्य 

 

कोलकाता।अंतरराष्ट्रीय संस्था रचनाकार ने देश की विभिन्न भाषाओं और बोलियां को सम्मान और संरक्षण देने के उपक्रम में एक बहुभाषी कवि सम्मेलन हलवासीय एंक्लेव में आयोजित किया, जिसमें विभिन्न भाषाओं के कवि शामिल हुए।

इस कवि सम्मेलन में विशेष अतिथि के तौर पर उपस्थित थे दैनिक छपते छपते के संपादक तथा ताजा टीवी के निदेशक श्री विश्वंभर नेवर। संस्था के संस्थापक सुरेश चौधरी की अध्यक्षता तथा साहित्य मंत्री रावेल पुष्प के संयोजन व संचालन में हुए इस कवि सम्मेलन में शिरकत कर रहे थे- हिंदी के शिवशंकर सिंह सुमीत, अल्पना सिंह, गुजराती के केयूर मजमूदार, राजस्थानी की चंदा प्रहलाद्का, रजनी मूंधड़ा तथा अंजू मनोत, भोजपुरी की पटना से पधारीं डॉ. पूनम आनंद तथा गणेश विनायक, पंजाबी की लुधियाना(पंजाब) से पधारीं देवेंदर कौर और भूपेंदर सिंह बशर, मैथिली की हिमाद्रि मिश्रा हिम तथा रंजना झा,मगही के रमाकांत सिन्हा, आसामी के हेमेन भट्टाचार्य, उड़िया के प्रशांत कुमार नाथ, नेपाली के नारायण प्रसाद होमगाई तथा अंग्रेजी के बेंगलुरु से पधारे सिद्धार्थ झा और रचना सरन, संस्कृत के लिए सुरेश चौधरी। इसके अलावा अन्य भाषाओं से अनुवाद कविताओं का पाठ कर रही थीं अनुवादिका बेबी कारफारमा।

 

कवि सम्मेलन का संचालन करते हुए रावेल पुष्प में देश से विलुप्ति की कगार पर पहुंच रही भाषाओं का जहां जिक्र किया वहीं विश्व की विलुप्ति की आखिरी पायदान पर पहुंची कई भाषाओं पर का भी जिक्र किया। इसके साथ ही उन्होंने एक विलुप्त हुई कुसदिली भाषा के बारे में रोचक जानकारी दी कि ये भाषा तुर्की के एक छोटे से गांव कुस्तोय में बोली जाती थी, जो दरअसल पक्षियों की भाषा थी और कभी गांव वाले पक्षियों से बातें किया करते थे।

कवियों को सम्मान देने के क्रम में शामिल थे- सुरेन्द्र सिंह, सविता भुवानिया,शशि लाहोटी,उषा पांडे तथा मौसमी प्रसाद ।

आखिर में संस्था की अध्यक्ष रचना सरन ने सभी को धन्यवाद दिया।

इस तरह के कार्यक्रम देश की सभी भाषाओं को सम्मान के साथ आपसी सद्भाव की दिशा में भी एक सार्थक कदम रहा।

प्रेषक: रावेल पुष्प, वरिष्ठ पत्रकार कोलकाता/9434198898.

 

 

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