Friday , June 19 2026

Literature

अब हुए अपने अलविदा

अब हुए अपने अलविदा मुसाफिर अपने हुए* कितने आए कितने चले गए जिन्दगी की राहों पे चलते चलते मुसाफिर मिलते गए किसी ने पूछा हाल क्या है? कैसे दिन चल रहे? अच्छे तो हो | फिर ऐसे लोग भी मिले लेकिन कतराए निकल पड़े इन्हे समय न था दो चार …

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राष्ट्र हमारे लिए राम है

राष्ट्र हमारे लिए राम है 1. क्रान्ति की देशना काव्य का कर्म है, प्रीति हर पंथ के ग्रंथ का मर्म है। मज़हबों के मुरीदो! हमारे लिए, राष्ट्र ही देवता राष्ट्र ही धर्म है।। 2. उसका अनुचिन्तन ललाम है, वो संज्ञा वो सर्वनाम है। राम हमारे लिए राष्ट्र है, राष्ट्र हमारे …

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भेड़ियों के सामने मत वेद मंत्रों को पढ़े

दो मुक्तक भेड़ियों के सामने मत वेद मंत्रों को पढ़े – डाॅ. शिव ओम अम्बर 1. भेड़ियों के सामने मत वेदमंत्रों को पढें, अग्निशर गाण्डीव पे फिर से चढ़ाएँ मान्यवर। जिन दरख़्तों से बग़ीचे को महज़ काँटे मिले, उन दरख़्तों को बग़ीचे से हटाएँ मान्यवर।। 2. तक्षकों के वंशधर जब …

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बहुत आसान है मंचों पे वंदे मातरम् कहना

दो मुक्तक बहुत आसान है मंचों पे वंदे मातरम् कहना हमेशा राष्ट्र-रक्षा के लिए उद्यत सजग रहना प्रकृृति रणबाँकुरों की है कटारें वक्ष पे सहना, बहुत मुश्किल है सीमाओं पे लिखना रक्त से उसको बहुत आसान है मंचों पे वन्दे मातरम् कहना।। 2. रणांगण में प्रखर प्रतिरोध के प्रतिमान की …

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मेरी मां

       मेरी मां                       मेरी मां  नही गाती  थी न लोरी न गीत न  रहीम, रसखान, तुलसी मीरा की प्रीत   जब देती थी थपकी मुझे  सुलाने को , लग जाती थी गम को भुलाने में   फिर भी …

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धर्म पूछकर जिनको मारा उनका भी तर्पण करना है

धर्म पूछकर जिनको मारा उनका भी तर्पण करना है   भारतीय सिंहों नें, रण में गर्जन शुरू किया है। किया आपरेशन सिंदूरी,बदला तनिक लिया है।   भाग नहीं पाएगा कायर,छुपे किसी भी बिल में हर भारत वासी की ईच्छा और इरादा मन मे   क्या होती सिंदूरी कीमत, अब हम …

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मातृभूमि

            मातृभूमि तेरी स्मृति में जाग-जाग तेरी चाहत में रही भाग कुछ तो संकेत किया होता कब तक गाऊँ एकांत राग जिस पर मैंने आँखें खोली जिस पर मेरी पाँखें डोली मेरा पहला रुनझुन गूँजा निकली मेरी पहली बोली मैंने कुछ बीज लगाए थे मैंने …

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अवैतनिक मजदूर

अवैतनिक मजदूर   365 दिन चकरघिन्नी सी नाचती परिवार की जिम्मेदारियों को उठाती पति –परिवार की जरूरतों पर खुद को वारती अपनी पहचान को उनकी पहचान में ढालती   ऐसी समर्पित 80 प्रतिशत नारियों तुम्हारे लिए छुट्टी के नाम पर नही कोई दिन और तारीख है न कोई गृहणी दिवस …

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श्रम शक्ति है श्रम भक्ति है

श्रम सत्यार्थ—– श्रम शक्ति है श्रम भक्ति है श्रमिक श्रम का आधार श्रमिक सारा संसार!!   बौद्धिक श्रम शारीरिक श्रम श्रम के अध्याय आयाम श्रम से ही विकास निर्माण!!   श्रम से ही कल कारखाने जल विद्युत पथ संचार!!   श्रम धर्म है श्रमिक मर्म है श्रम कर्म सत्यार्थ ब्रह्माड!! …

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परशुराम—   राम प्रथम ब्रह्मांड देव चिरंजीवी ब्रह्मांड श्रेष्ठ शिष्य रुद्र भक्ति शक्ति शाश्वत अभिमान राम।।   श्रेष्ठ शिव शिष्य फरसा श्रेष्ठता वरदान सारंग फरसा नारायण शिव समन्वय शक्ति गौरव गान नाम नही आदि अनंत सत्य सनातन सत्यार्थ परशुराम।।   जादाग्नि पुत्र भार्गव कुल गौरव कर्म धर्म ज्ञान योग्य बैभव …

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