Monday , August 3 2026

Literature

गाथा की शान स्वाभिमान

—– हिन्द की सेना—– बर्फ चट्टानों पे एक हाथ संगीन दूजे हाथ तिरंगा रेतीले तूफानों में खड़ा बना फौलाद देश की सीमाओं मुश्तैद जवान।। नयी नवेली दुल्हन कर रही होती है इंतज़ार ईश्वर से आशीर्वाद मांगती बना रहे सुहाग।। बूढे माँ बाप की पथराई आँखे अपने सपूत का एकटक इंतज़ार …

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जिंदा इंसान

             जिन्दा इंसान — बझे तीर में धार नहीं आती जंग खाई तलवार में मार नहीं आती।।   जरुरी नहीं की सांसो धड़कन का आदमी इंसान जिन्दा हो!   पुतला भो हो सकता है पुतलों के कदमो की चाल आवाज नहीं आती।।   जिन्दा आदमी …

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आग की लपटे

                    आग की लपटे   ये आग की लपटें बड़ी ऊंची है, कहां से कहां पहुंच जाती है क्या क्या  निगल जाती है मीलों की दूरी सेकेंड में तय कर आती है भयावह विनाश रच जाती है। जला जाती है सपनों …

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मत छोड़ना लिखना तुम

मत छोड़ना लिखना तुम ………………………….. कवि! सुना है! अपनी ही जड़ों से उखड़ने लगा है आदमी, मैली हो गई हैं नदियाँ, हम काट रहे हैं जंगल, खिसकने लगी हैं पहाड़ की परतें और गमले में आ गया है वृक्ष! तेज, बहुत तेज हो गई है सूरज की तपिश! और बच्चों …

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भीख में आबो-दाना नहीं चाहिए

तुझसे कुछ ऐ ज़माना नहीं चाहिए भीख में आबो-दाना नहीं चाहिए चाल टेढ़ी रखे और न सुधरे कभी उसके दिल में ठिकाना नहीं चाहिए तेरा चहरा नुमाइश न कर दे कहीं दर्द दिल में दबाना नहीं चाहिए हमसफ़र से इसे बाँटना ठीक है बोझ अकेले उठाना नहीं चाहिए हो मुबारक …

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भारत इजरायल नही

भारत इजरायल नहीं – अक्सर लोग उठाते है सवाल सोशल मीडिया पर सवालों की होती भरमार   भारत इजरायल नहीं उसमे लड़ने का सामर्थ्य नहीं नहीं है उसमे शत्रुओं को सबक सिखाने का माद्दा दुश्मन देशों को औकात दिखाने का रास्ता।   कभी कहते कमजोर सरकार तो कभी मंत्रियों का …

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शांति कायरता नही

शांति कायरता नहीं —- शौर्य पराक्रम प्रगति प्रतिष्ठा कि जननी भरणी सौहार्द शांति सरोवर अमृत हूँ!!   विनम्र संस्कृति क्षमा दया करुणा कि गागर सागर मानवता मूल्यों कि शांति मै अवनी हूँ!!   संस्कार परमार्थ है मेरा पथ समय काल समाज कल्याण कि देव और देवी समता ममतामयी हूँ!!   …

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खून और सिंदूर

खून और सिंदूर—– हार नहीं निर्भीक निडर पथ विजय हमारा कहती है दुनियां जानती है दुनियां भरत भारत कि सेना है हम!!   आंख दिखाए गर कोई औकात बता देते है हम माँ भारती के वीर सपूत दुश्मन का नामो निशान मिटा देते है हम कहती है दुनियां जानती है …

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अब हुए अपने अलविदा

अब हुए अपने अलविदा मुसाफिर अपने हुए* कितने आए कितने चले गए जिन्दगी की राहों पे चलते चलते मुसाफिर मिलते गए किसी ने पूछा हाल क्या है? कैसे दिन चल रहे? अच्छे तो हो | फिर ऐसे लोग भी मिले लेकिन कतराए निकल पड़े इन्हे समय न था दो चार …

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राष्ट्र हमारे लिए राम है

राष्ट्र हमारे लिए राम है 1. क्रान्ति की देशना काव्य का कर्म है, प्रीति हर पंथ के ग्रंथ का मर्म है। मज़हबों के मुरीदो! हमारे लिए, राष्ट्र ही देवता राष्ट्र ही धर्म है।। 2. उसका अनुचिन्तन ललाम है, वो संज्ञा वो सर्वनाम है। राम हमारे लिए राष्ट्र है, राष्ट्र हमारे …

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