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मुंशी प्रेमचंद्र की रचनाएं आज भी प्रासंगिक

हिंदी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल में प्रेमचंद जयंती पर विशेष व्याख्यान आयोजित

 

हावड़ा (31 जुलाई, 2026) : हिंदी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल द्वारा माननीया कुलपति प्रोफेसर नंदिनी साहू की अध्यक्षता में प्रेमचंद जयंती के अवसर पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।

 

कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के हिंदी विभाग एवं विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर जितेंद्र श्रीवास्तव थे। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. रेखा कुमारी त्रिपाठी ने किया।

 

अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कुलपति प्रो. नंदिनी साहू ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद का साहित्य वर्तमान युग में भी पूर्णतः प्रासंगिक है। उनकी कहानियों और उपन्यासों में चित्रित सामाजिक-आर्थिक विषमता, किसानों का शोषण, भ्रष्टाचार, जातिगत भेदभाव और नारी उत्पीड़न जैसी समस्याएँ आज भी विद्यमान हैं।

 

विशिष्ट वक्ता प्रो. जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि प्रेमचंद का मानवतावाद और शोषण के विरुद्ध संघर्ष का स्वर आज भी साहित्य, समाज और आम जनमानस के लिए सबसे बड़ा मार्गदर्शक है।

 

डॉ. रेखा कुमारी त्रिपाठी ने अपने संचालन में कहा कि समकालीन संदर्भ में भी प्रेमचंद की प्रासंगिकता बनी हुई है। वे केवल उपन्यास सम्राट ही नहीं थे, बल्कि समाज के सच्चे चिकित्सक भी थे। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण और बाजारवाद के इस दौर में भी प्रेमचंद की यथार्थवादी दृष्टि हमें आत्ममंथन करने की प्रेरणा देती है।का

कार्यक्रम के  अंत में डॉ. त्रिपाठी ने सभी आगंतुकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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