Friday , July 31 2026

दोस्ती का दीप

अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस (2 अगस्त) के अवसर पर

दोस्ती का दीप

 

 

 

सुलगती हुई सरहदें पूछ रही हैं,

कब ख़त्म होगी नफ़रत की रात?

कब धरती के कोने-कोने में ही

गूँज उठेगी मधुर प्रेम की  बात?

 

तोपों से कभी अमन नहीं उग सकता,

और न तलवारें फूल खिला सकतीं

दोस्ती की शीतल मन्द समीर में ही

सुख की नदियाँ कल-कल बह सकतीं

 

आओ, दिलों का हर द्वार खोल दें,

 कसकर थामें इक-दूजे का  हाथ।

रंग, नस्ल और सारे धर्म भुलाकर,

 अब धरती माँ की धूल लगाएँ माथ।

 

किसी माँ की गोद कभी भी न उजड़े,

किसी शिशु को न हो कोई विवशता

युद्ध की आग में झुलसती मानवता हम सब कर दें उसकी शल्य चिकित्सा

 

देखने का सूरज एक,चाँद भी एक

एक ही आकाश और एक ही धरती

फिर क्यों हमारी भावनाएं ऐसी-,

जो दिलों में इतनी दूरियाँ भरती?

 

आओ, बनें हम सब देशों के मित्र,

और जीतें हर इक इंसान का दिल।

प्रेम की भाषा बोलते-बोलते

रहें सदा मिल-जुलकर, हिल-मिल।

 

आओ,इस नई सदी के गीत लिखें

मेरा सपना है,हर हाथ में हो फूल

हर होंठ पर मधुर मुस्कान खिले

 मन से उड़ जाये सब कलुषित धूल

 

आओ, आज हम सब यह प्रण लें

नफ़रत के हर स्रोत को मिटाएँगे

सारी दुनिया को करेंगे हम रौशन

दोस्ती का दीप, हर दिशा जलाएँगे

 

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