Monday , August 3 2026

Literature

उम्मीद की तरफ लौटना तुम

‘उम्मीद की तरह लौटना तुम’     कविता संग्रह- ‘उम्मीद की तरह लौटना तुम’ लेखक- पंकज सुबीर, समीक्षक- शैलेन्द्र शरण प्रकाशक : शिवना प्रकाशन, सीहोर (म.प्र.) मूल्य- 300 रुपये, वर्ष- 2025, पृष्ठ- 184           मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों, पीड़ा और पुनर्जीवन की आकांक्षा का दस्तावेज़   पंकज …

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सारे जहां से अच्छा

सारे जहां से अच्छा भारत देश हमारा–   सारे जहां से प्यारा यह देश है हमारा भारत है जिसको कहते दुनियां सबसे न्यारा।।   माटी है जिसकी पावन माता जिसे हम कहते बेटियां यहाँ कि देवी नारी को पूजते।।   बच्चा बच्चा है जैसे राम कण कण हैं बसते कंकड़ …

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अरमानों के आसमान पर लहराता तिरंगा

अरमानों के आसमान पर लहराता —     अरमानों के आसमान पे लहराता जन गण मन कि शान वंदे मातरम का सम्मान भारत का अभिमान।। गंगा की धाराओं की कल कल कलरव की आवाज सत्य अहिंसा का गांधी जय जवान जय किसान।। अरमानों के आसमान पे लहराता जन गण मन …

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अंधकार में हम साहस का दीप जलाते है

भारत माता का वंदन   अंधकार में हम साहस के,दीप जलाते हैं। आज़ादी के मधुर तराने,नित हम गाते हैं।।   चंद्रगुप्त की धरती है यह,वीर शिवा की आन है। राणाओं की शौर्य धरा यह,पोरस का सम्मान है।। वतनपरस्ती तो गहना है,हृदय सजाते हैं। आज़ादी के मधुर तराने,नित हम गाते हैं।। …

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एक ही घूँट में दीवाने जहाँ तक पहुँचे।

नीरज जी की ग़ज़लों में जगह-जगह व्यंग्य की अन्तर्धारा के दर्शन होते हैं एक ज़माना था जब ग़ज़ल शब्द का उच्चारण करते ही चित्त में किसी शाही दरबार में मखमली कालीन पे चलती हुई नाज़नीन का बिम्ब जागा करता था, शायरी नायिका के नख-शिख वर्णन की वर्णमाला होकर रह गयी …

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ये कैसा हिंदुस्तान

—भारत कैसे बन गया हिंदस्तान— संस्कृति संस्कार महान सक्षम खुशहाल भारत सोने की चिड़िया कहलाता दुनियां का दिग्दर्शक भारत अब है हिंदुस्तान।। आपस मे लड़ते भिड़ते बात बात पर एक दूजे के लहू के प्यासे शासक भारत की शान!! चंद कबीलों की एकता ताकत का हो गया गुलाम बंट गया …

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डूडल

डूडल  (कामचोर)  दो -दो डूडल दोनो डूडल  बैठ कर करते पटर -पटर पचर -पचर दोनो कुछ भी काम न  करते सारा दिन आराम करते  आराम कर कभी न थकते   बातों में  हरदम रमते  पटर पटर पचर पचर.   दुनिया को कुछ  न समझे  खुद   के ज्ञान पर खुद ही …

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ये शायरी जुबां है किसी बेजुबान की

ये शायरी जुबां है किसी बेजुबान की  –  गीत-गन्धर्व नीरज की शाश्वती देशना  ( भाग १ ) बात आज से लगभग चार दशक पूर्व की है। एक कवि के रूप में मंच पर मेरा आगमन हुए थोड़ा ही समय बीता था। मंच के युवा संचालक के रूप में मुझे सामान्यजन …

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जिंदगी हमनाज है

जिंदगी — जिंदगी हमनाज है जिंदगी अंदाज है जिंदगी अरमा आकाश है!! जिंदगी रिश्ते नातेदार कि है जिंदगी धड़कन सांस कि है जिंदगी आश विश्वास कि है जिंदगी जज्बे जज्बात कि है जिंदगी आपकी है लेकिन नियत के हाथ कि है!! जिंदगी तकदीर का तराना जिंदगी जीने का बहाना जिंदगी …

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कब हम आजाद हुए

कब हम आजाद हुए ये आजादी नहीं दूर्निति और गुलामी का नया स्वरुप है कब हम आजाद हुए? ना हम कभी आजाद थे और ना ही हम आजाद है आजादी सिर्फ एक सपना था हमने आजादी को हासिल किया नहीं मुगलो ने हमें दबाया अंग्रेजो ने भी! बर्षो हम उनके …

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