Tuesday , February 3 2026

विपत्ति में महापुरुष निखरते है

विपत्ति में महापुरुष निखरते हैं,बिखरते नहीं: क्षमाराम महाराज

 

 

हावड़ा सत्संग समिति द्वारा फोरशोर रोड स्थित लक्ष्मी विलास गार्डन में रामचरितमानस के सामूहिक पाठ के चतुर्थ दिन सिंहस्थल पीठाधीश्वर महंत क्षमाराम महाराज ने पाठ से पूर्व सार बताते हुए कहा कि राजा दशरथ राम की लीला से बंधे हैं।कैकेयी ने दशरथ जी से कोपभवन में एक वरदान से भरत के लिए राज्याभिषेक व दूसरे वरदान से राम के लिए तपस्वी वेष में 14 वर्ष का वनवास मांगा।

इसे सुनकर राजा दशरथ बेचैन हो गए,बोले भरत और राम तो मेरे हृदय की आंखें हैं।तू तो कहती थी राम को राज्याभिषेक कर दूं ,लगता है तेरी कथनी ही झूठ थी।इधर रात भर दशरथजी माथा पीटते रहे उधर सवेरा हुआ।प्रजा जन इन सबसे अनजान थे। गुरु वशिष्ठ ने सुमंत्र को हालचाल जानने के लिए महल के भीतर भेजा। सुमंत्र जैसे गए तो कैकेयी बोली जाओ राम के पास जाओ,कहो कि महाराज बुला रहे हैं।

राम को जैसे ही पता चला कि उनका वनवास हुआ है तो उनका चेहरा दमकने लगा,मुरझाया नहीं।संत-महापुरुष विपत्ति में बिखरते नहीं निखरते हैं।देश की आजादी के समय फांसी की सजा सुनकर क्रांति करने वाले हमारे शहीद-महापुरुष प्रसन्न हो जाते थे।

उनका उत्साह कम नहीं ज्यादा हो जाता था।हंसते -हंसते फांसी को स्वीकार कर हमारे प्रेरक बन गए।  उस समय महात्मा गांधी क्रांतिकारियों का और समर्थन करते तो देश का आज दूसरा स्वरूप होता।  भगत सिंह,नेताजी सुभाषचंद्र बोस आदि क्रांतिकारियों को कौन भूल सकता है।  नेताजी ने कहा था,तुम मुझे खून दो मैं तुझे आजादी दूंगा,यह उनके देशप्रेम का प्रमाण था।आज सभी को ऐसे ही देशप्रेम की जरूरत है।

सामूहिक पाठ का आयोजन मनमोहन मल्ल एवं पवन पचेरिया के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर पुरुषोत्तम पचेरिया,केशव बूबना,गोपी मोहता,हरि भगवान तापडिया,अजय पचेरिया,राजकुमार मोहता,राजेन्द्र धनानिया की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।गीता प्रेस साहित्य उपलब्ध कराने में प्रभु दयाल राजपुरोहित सक्रिय थे।

सूचना प्रसारण महावीर प्रसाद रावत ने किया।

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