आवाज का अंदाज भोजपुरी भाषा के महानायक जुगानी भाई–


आत्मा कर्मानुसार काया के साथ जन्म लेती है काल समय के पल प्रहर कि नित्य निरंतरता में अपने जन्म जीवन के उद्देश्यों कि महत्वपूर्ण यात्रा करती रहती हैं तो अक्षर और शब्दों के समन्वय से भावों संवेदनाओं का संचार करती संवाद करती है और सम्बन्धो एव समाज को जानती पहचानती एव निरूपित करती आदि अनंत की यात्रा करती अनंत सृष्टि में विचरण करती रहती है! स्वर अक्षर एव शव्दों का समुच्चय समन्वय जब भी व्यक्त किया जाता है तब स्वर ही उसका माध्यम बनता है बहुत स्प्ष्ट है कि सृष्टि में प्राणी के होने ना होने का आत्मीय स्वरूप सत्य है! वैज्ञानिकों द्वारा अपने शोध के द्वारा निरंतर अथक प्रयास किया जा रहा है जिससे कि सृष्टि में अब तक संचारित स्वरों को पहचाना जाय एव उसकी प्रमाणिकता की ठोस आधार पर पुष्टि कि जाय विज्ञान एव वैज्ञानिक अपने इस शोध के सार्थक परिणाम के बहुत निकट है! प्राणी प्राण कि उपस्थिति सृष्टि में तब तक प्रामाणिक नही है जब तक उसके द्वारा स्वर का संचार नही किया जाता युग सृष्टि कि दृष्टि में स्वर प्राणी के जीवन यात्रा की विशेषता है एव विशेष पहचान है महाभारत काल मे कुरुक्षेत्र में भगवान श्री कृष्ण का अर्जुन को गीता उपदेश स्वर ईश्वरीय सत्य का प्रमाण एव साक्ष्य है ! एक गीत बहुत मशहूर है -( चेहरा ए बदल जायेगा मेरी आवाज ही मेरी पहचान है) अर्थात काया तो अवस्था अनुसार परिवर्तनीय है आवाज स्वर नही स्वर के आधार पर किसी भी प्राणी का अतीत भविष्य विल्कुल स्पस्ट जाना समझा जा सकता है इस विषय पर मैंने अनेकों भारतीय एव पश्चात खगोलीय एव गणतिय ग्रंथो का अध्ययन कर सत्यापित किया है! पूज्य अटल जी का स्वर संचार संवाद शायद कोई भूल सकता है ! विनका गीत माला के अमीन स्यानी ,बी आर चोपड़ा के धारावाहिक महाभारत के हरीश भिमानी जिनके स्वर – मै समय हूँ कौन भूल सकता है ! वर्तमान में महानायक अमिताभ बच्चन, शत्रुघन सिन्हा, राजकुमार ऐसे स्वर के धनी थे या है जिसके कारण युग काल समय मे उनकी पहचान है इसी कड़ी की एक महत्वपूर्ण लड़ी है स्वर्गीय लता मन्गेसकर जी सम्पूर्ण वैश्विक परिवेश के वर्तमान अतीत में ऐसे अनगिनत जन्म जीवन नाम है जिन्होंने अपने स्वर संवाद संचार से समय काल परिस्थित को परिवर्तित कर दिया वर्तमान समय भारत में मुख्य विपक्षी राजनीतिक दल की मुख्य समस्याओ में महत्वपूर्ण समस्या यह हैं कि उनके पास एक अदद ऐसा कोई नेतृत्व है ही नही जो स्वंय को दल की दृष्टि उद्देश्य के सापेक्ष स्वंय के द्वारा बहुसंख्यक समाज को आकर्षित कर सके प्रभावित कर सके एव भवनाओं कि उच्च सामाजिक राष्ट्रीय हित हितार्थ दल कि दृष्टि से सबद्ध कर सकने में सक्षम हो सके जबकि सत्ताधारी दल के पास आदरणीय नरेंद्र मोदी जी के साथ एक लंबी श्रृंखला है जो कारगर प्रभावी एव भवनात्मक राष्ट्रीय सोच को यथार्थ में परिणित करने मे सफल सक्षम है किसी भी जय पराजय में स्वर का अति महत्वपूर्ण योगदान होता है! सिकंदर कि सेना थकान कि हताशा निराशा वेदना से लगभग पराजय को वरण करने ही वाली थी तब सिकंदर द्वारा अपने स्वर के माध्यम से अपनी हताश सेना को अपने उद्देश्य की ऊर्जा से प्रेरित कर जीवन से अधिक प्रिय जय विजय को बना दिया गया इतिहास गवाह है सिकन्दर विजयी रहा! स्वर शिखर के अनमोल रत्न भोजपुरी भाषा के भीष्म स्यानी ,हरीश भिमानी ,या महानायक स्वर्गीय डॉ रविन्द्र श्रीवास्तव उर्फ जुगनी भाई को कौन भूल सकता है जिनकी आवाज ने भोजपुरी भाषा को भोजपुरी भाषी क्षेत्र के घर घर पहुचाया मुझे याद है अपना बचपन जब शाम होती थी तब हर घर लोग ट्रांजिस्टर लेकर जुगनी भाई का कार्यक्रम सुनने बैठ जाते थे जुगनी भाई की आवाज स्वर में वो जादू था जो बच्चे बूढ़े जवान सभी को आकर्षित करता प्रभावित करता जुगनी भाई भोजपुरी भाषा की पहचान अभिमान के विराट व्यक्तित्व के रूप स्थापित थे !
जुगानी भाई ने अपने आवाज से भोजपुरी भाषा को नई पहचान ऊंचाई दिया और अपने वर्तमान से भोजपुरी भाषियो के अतीत के गौरव से भविष्य का पथ प्रदर्शन किया !
जन्म-
जुगानी भाई का जन्म 12 मई 1942 बाबूजी सर्वदेव लाल एव सरस्वती देवी कि संतान के रूप में गोरखपुर जनपद के भवा जीतपुर में हुआ था
शिक्षा—
1978 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम ए किया उससे पूर्व उन्होंने बी एम एस एव फिजियोथेरेपी कि शिक्षा ग्रहण कि !
आकाशवाणी कि वाणी —
गोरखपुर आकाशवाणी से सन 1972 ग्रामीण प्रसारणों से शुभारंभ कर अपने विशेष अंदाज आवाज में भोजपुरी भाषा मे किया उनके कार्यक्रम प्रसारण में उनके साथ हरिराम द्विवेदी उर्फ हरि भैया रहते जुगानी भाई की आवाज उत्तर प्रदेश पुर्वांचल के खेत खलिहानों तक लगभग तीन दशकों तक गूंजता रहा हालात यह थे कि शायद किसी को जुगानी भाई का नाम रविंद्र श्रीवास्तव याद हो बच्चा बच्चा जुगानी भाई को ही जनता है! कम्पिययरिंग के अलावा आकाश वाणी गोरखपुर के लिए 500 लघु नाटको का लेखन एव निर्देशन किया जुगानी भाई राष्ट्रीय सहारा में साप्ताहिक लेख # बेंगुची चलल ठोकावे नाल # के अंतर्गत स्तम्भ लिखते गोरखपुर आकाशवाणी से 2003 में सेवा निवृत्त होने के बाद भी जुगानी भाई साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े रहे !
सम्मान काअभिमान–
2001 में संस्कार भारती ,2002 लोकभूषण,2004 में भोजपुरी रत्न,2009 सरयू रत्न ,2011 में पंडित श्याम नारायण पांडेय सम्मान,2012 राहुल सांकृत्यायन सम्मान,2013 में विद्याश्री न्यास का आचार्य विद्या निवास मिश्र स्मृति सामान ,भोजपुरी भाषा को उच्चतम शिखर पर स्थापित करने के प्रयास पराक्रम के लिए 2015 भिखारी ठाकुर सम्मान,उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से लोक भूषण सम्मान -2024 भोजपुरी कि कालजयी कृतियां– जुगानी भाई ने गोरखपुर आकाश वाणी को अपनी कालजयी भोजपुरी कृतियों से सवृद्ध किया उनकी कृति मोथा और मति,गीत गांव गांव के,नोकियात दुब,अबहीन कुछ बाकी बा, आखिरी कविता से भोजपुरी साहित्य अभिभूत अभिमानित है!
जुगानी भाई के जीवन अनुष्ठान
का यथार्थ का वर्तमान एव भविष्य-
भोजपुरी भाषा के स्वर साम्राज्य के प्रथम पराक्रम पुरुष एव महानायक जुगानी भाई के विषय मे लिखना कठिन एव लगभग असंभव है मैंने अपनी सोच समझ से भाषा साहित्य के सौरभ जुगानी भाई को भोजपुरी भाषियो के लिए उनके जागरण जागृती के लिए प्रेरणा पुरुष के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास कोशिश इस आशय विश्वास के साथ किया है कि वर्तमान एव भविष्य की पीढ़ी को अपनी मातृभाषा हिंदी कि सहोदरी बहन भोजपुरी भाषा गर्व एव अंतर्मन से ग्राह हो जिससे कि भोजपुरी भाषा का पावन प्रवाह भोजपुरी भाषियो में ही नही बल्कि समूर्ण भारत से होते हुए वैश्विक स्तर पर गौरवान्वित हो और भोजपुरी भाषियों के त्याग बलिदान के देश मॉरीशस, फिजी, गुएना आदि की तरह भोजपुरी भारत मे फले फुले यही आवाज है जुगानी भाई कि यही उद्देश्य है जुगानी भाई की यही सत्यार्थ है जुगानी भाई के जन्म जीवन कि !!
14 फरवरी 2025 को भोजपुरी भाषा कि आवाज का महानायक अपनी अविस्मरणीय जीवन यात्रा कि धन्य धरोहर छोड़ महाप्रयाण कर गया जो भोजपुरी समाज भाषा के लिए दृष्टि दृष्टिकोण है!
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