स्मृतियों की रौशनी में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई जी की जन्म जयंती

मैं जी भर जिया मै मन से मरु – डाक्टर सुकांत मजूमदार
भारतीय जनता पार्टी द्वारा नेशनल लाइब्रेरी के सभागार में लोकप्रिय प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई जी की जन्म जयंती मनाई गई । इस अवसर पर भाजपा के उच्च पदासीन नेताओं ने मंच की शोभा बढ़ाने के साथ -साथ अटल जी के साथ गुजारे हुए पलों और उनकी विशिष्ट वाक्य पटुता को याद करते हुए अनेक स्मृतियां साझा की।
कार्यक्रम के अध्यक्ष : बंगाल प्रभारी सुनील बंसल
ने अटल जी को याद करते हुए उनके शानदार व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा की ओर 25 दिसंबर को अनुशासन दिवस घोषित करने पर खुशी जताई।
सांसद ,डाक्टर सुकांत मजूमदार:
“मैं जी भर जिया मै मन से मरु ” अटल जी की लोकप्रिय पंक्तियों को सुनाते हुए कहा कि अटल जी अजातशत्रु थे । अटल जी ने राजनीति में बहुत परिवर्तन किया। भाषण के जादूगर एवं विनम्र व्यक्ति थे उन्हें सभी पार्टी के लोग पसंद करते थे। पैसे से सत्ता पाना मेरी पसंद नही इससे दूर रहना ही अच्छा कहने वाले अटल जी आदर्श के साथ बेईमानी पसंद नही करते थे।
शुभेंदु अधिकारी : विपक्ष नेता पश्चिम बंगाल
अटल जी ने बहुत सी योजनाएं बनाई। सर्व शिक्षा, उन्हें देश की चिंता थी,परमाणु शक्ति को सशक्त बनाने का कार्य किया। कारगिल विजय का श्रेय अटल जी को जाता है।
शामिक भट्टाचार्य: अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद
हम पश्चिम बंगाल की माटी में रहने आए है छोड़ कर जाने के लिए नही ।
एक बार बंगाल में भाजपा की रैली में अपार भीड़ थी जिसे देखकर अटल जी ने कहा कि – रैली में काफी लोग जबकि बंगाल में एक भी कमल नहीं खिला, किंतु संख्या देखकर ये समझा जा सकता है की लोगो के दिलों में कमल खिल चुका है।”
ऐसे ही चुनाव में भाजपा की सीट कम आई जबकि वोट काफी पड़े इसपर अटल जी ने कहा की -” हम जीते मैदान में लेकिन हारे दरबार में।”
उन्होंने एक बार एक सभा में ये कहकर सर्जरी का उदाहरण दिया कि हम सनातनी है गणेश जी के कटे सर पर हाथी का सर लगा कर उसकी पूजा करते है। हमारे यहां सर्जरी आदिकाल से है।
कार्यक्रम की सफलता का श्रेष्ठ उदाहरण कार्यकर्ताओं की भीड़ जो कुर्सियों के भर जानें पर काफ़ी तादाद में खड़े हुए थे।
वरिष्ठ राज्यनितिज्ञ प्रताप बनर्जी ने कार्यक्रम का संचालन किया एवं धन्यवाद ज्ञापन दिया।
– शकुन त्रिवेदी
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