शाही जी की कविताएं वर्तमान समय की मौलिक दस्तावेज – डाक्टर प्रेम शंकर त्रिपाठी

कोलकाता २७ जनवरी। वरिष्ठ कवि, आलोचक, संपादक एवं काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य डॉ. सदानन्द शाही के सद्य प्रकाशित काव्य कृति संगतराश को केंद्रित कर सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय के पुस्तकालय कक्ष में कवि के साथ आत्मीय गोष्ठी का आयोजन किया गया।*कवि के साथ आत्मीय संवाद*
कोलकाता २७ जनवरी। वरिष्ठ कवि, आलोचक, संपादक एवं काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य डॉ. सदानन्द शाही के सद्य प्रकाशित काव्य कृति संगतराश को केंद्रित कर सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय के पुस्तकालय कक्ष में कवि के साथ आत्मीय गोष्ठी का आयोजन किया गया।
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ प्रेमशंकर त्रिपाठी ने कहा कि शाही जी की कविताएं वर्तमान समय की मौलिक दस्तावेज हैं। इनकी कविताओं में सादगी के साथ आम आदमी की संवेदनशीलता भी दिखाई देती है। इस गोष्ठी के केंद्र बिन्दु कवि सदानन्द शाही ने अपने इस संग्रह के बनने की प्रक्रिया के साथ, कविताओं पर भी अपने विचार प्रस्तुत किए तथा इस संग्रह की कुछ कविताओं का पाठ भी किया।
इस गोष्ठी का कुशल संचालन डॉ कमल कुमार और धन्यवाद ज्ञापन भागीरथ सारस्वत ने किया।
इस अंतरंग गोष्ठी में श्री अजयेंद्र त्रिवेदी, श्रीमोहन तिवारी, डॉ दीक्षा गुप्ता, दिव्या प्रसाद, शनि कुमार, पूजा प्रसाद, राजेन्द्र अरोड़ा, सर्वदेव तिवारी, लक्ष्मी जायसवाल के साथ अन्य साहित्यप्रेमी मौजूद थे।
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ प्रेमशंकर त्रिपाठी ने कहा कि शाही जी की कविताएं वर्तमान समय की मौलिक दस्तावेज हैं। इनकी कविताओं में सादगी के साथ आम आदमी की संवेदनशीलता भी दिखाई देती है।
इस गोष्ठी के केंद्र बिन्दु कवि सदानन्द शाही ने अपने इस संग्रह के बनने की प्रक्रिया के साथ, कविताओं पर भी अपने विचार प्रस्तुत किए तथा इस संग्रह की कुछ कविताओं का पाठ भी किया। इस गोष्ठी का कुशल संचालन डॉ कमल कुमार और धन्यवाद ज्ञापन भागीरथ सारस्वत ने किया।
इस अंतरंग गोष्ठी में श्री अजयेंद्र त्रिवेदी, श्रीमोहन तिवारी, डॉ दीक्षा गुप्ता, दिव्या प्रसाद, शनि कुमार, पूजा प्रसाद, राजेन्द्र अरोड़ा, सर्वदेव तिवारी, लक्ष्मी जायसवाल के साथ अन्य साहित्यप्रेमी मौजूद थे।
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