समारोह में वक्तव्य रखते हुए श्री विजय मनोहर तिवारी। अन्य मंचस्थ हैं, बांये से सर्वश्री बंशीधर शर्मा, महावीर बजाज, डॉ. अशोक लाहिड़ी, सज्जन कुमार तुल्स्यान एवं भागीरथ चांडक।
इतिहास से सीख कर ही सशक्त राष्ट्र निर्माण संभव – विजय मनोहर तिवारी
कोलकाता, 4 जनवरी। इतिहास से पीछा नहीं छुड़ाया जा सकता। इतिहास केवल अतित का विवरण नहीं बल्कि
वर्तमान को समझने एवं भविष्य को दिशा देनेवाली चेतना है। भारत केवल भूखंड नहीं बल्कि एक जीवंत सभ्यता
यात्रा है जो 12 से 18वीं शताब्दी तक के लूटपाट एवं विनाशकारी क्रूरता को झेलते हुए आज भी जिसकी जड़े प्राचीन
सम्राज्यों एवं दार्शनिक परंपराओं में गहराई से जुड़ी है। निकट अतित के इतिहास से सीख कर ही सशक्त राष्ट्र का
निर्माण संभव हैं क्योंकि प्रजातंत्र में क्रूरता का सामना कठोरता से किया जा सकता है। -ये उद्गार हैं माखनलाल
चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार वि विद्यालय के कुलपति श्री विजय मनोहर तिवारी के, जो आज स्थानीय
रथीन्द्र मंच में श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय द्वारा आयोजित दसवें कर्मयोगी जुगल किशोर जैथलिया स्मृति
व्याख्यानमाला में , भारत : इतिहास की अनकही कहानियाँ विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे प्रखर चिंतक एवं विधायक डॉ अशोक लाहिड़ी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि
इतिहास से हमें स्वाभिमान और सीख दोनों मिलते हैं। इतिहास की अनदेखी जोखिमपूर्ण है क्योंकि इतिहास स्वयं को
दोहराता है। पुराणों, रामायण एवं महाभारत में काव्यात्मकता के साथ ऐतिहासिक तत्व भी विद्यमान है।
समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ आयकर सलाहकार श्री सज्जन कुमार तुल्स्यान ने जैथलिया जी के कर्ममय जीवन
का स्मरण करते हुए उन्हें असाधारण व्यक्तित्व का धनी बताया। साथ ही आज की व्याख्यानमाला के विषय की
प्रासांगिकता की सराहना की।
पुस्तकालय के अध्यक्ष महावीर बजाज ने स्वागत भाषण में जुगल किशोर जैथलिया को व्यक्ति निर्माण का प्रेरक
बताते हुए कहा कि इतिहास की अनकही घटनाओं की जानकारी से स्वयं को जागृत करना तथा भावी पीढ़ी को तैयार
करना आवश्यक है तभी भारत का स्वाभिमान सुरक्षित रहेगा।
समारोह का प्रारंभ युवा गायक श्री अमित पटवा के “इतिहास गा रहा है दिन रात गुण हमारा ” गीत से हुआ। अतिथियों
का अंगवस्त्र एवं शॉल प्रदान कर स्वागत किया सर्वश्री बंशीधर शर्मा, रामचन्द्र अग्रवाल, नन्दकुमार लढा, डॉ. तारा दूगड़,
कृष्णा काकड़ा एवं मनीष जैन ने। शांति मंत्र का पाठ किया श्री अमित ओझा ने। कार्यक्रम का कुशल संचालन किया
संस्था के उपाध्यक्ष श्री महावीर प्रसाद रावत ने। मंच पर कुमारसभा के उपाध्यक्ष श्री भागीरथ चांडक भी उपस्थित थे।
समारोह में सर्वश्री आचार्य राकेश पाण्डेय, सांवरमल अग्रवाल, रमेश शोभासरिया, बालकिशन मूंधड़ा, डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी,
बुलाकीदास मीमाणी, राजीव शरण, मीनादेवी पुरोहित, विजय पाण्डेय, विजय ओझा, रामगोपाल सूंघा, ललित तोदी,
मोहनलाल पारीक, अरुणप्रकाश मल्लावत, दयाशंकर मिश्र, रामपुकार सिंह, घनश्याम चौरसिया, अनिल ओझा नीरद,
अजयेन्द्रनाथ त्रिवेदी, डॉ. आर.एस. मिश्रा, कैलाशचंद्र गुप्ता, मदनलाल बोथरा, सीताराम तिवाड़ी, संजय रस्तोगी, मानिक
पाल, कृष्ण कुमार खण्डेलवाल, प्रदीप सूंटवाल, तारक दत , गुड्डन सिंह, पवन धेलिया, जितेन्द्र जितांशु, ब्राहृानंद बंग, संजय
मंडल, डॉ. कमल कुमार, रचना त्रिपाठी, संदीप चौधरी, शंकरलाल अग्रवाल, स्नेहलता वैद, अजय चौबे, सत्यप्रकाश राय,
अशोक सोनकर, वेदप्रकाश गुप्ता गोविन्द जैथलिया, मीकू सोनी, सीमा रस्तोगी, पूर्णिमा कोठारी एवं गायत्री बजाज प्रभृति
विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोग बड़ी संख्या में सभागार में उपस्थित थे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में सर्वश्री चन्द्रकमार जैन, रमाकान्त सिन्हा, भागीरथ सारस्वत, हरभजन सिंह, अविनाश गुप्ता
एवं अरुण कुमार प्रभृति सक्रिय थे।