हिन्दी पत्रकारिता की आत्मा है न हो किसी से प्रभावित: प्रो.कृपाशंकर चौबे

कोलकाता: समग्र वर्ग की चिन्ता करना हिन्दी पत्रकारिता की राष्ट्रीय चेतना रही है। हिन्दी व अन्य भारतीय भाषाओं ने भारतीय ज्ञान परम्परा को आगे बढ़ाया है। भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता का भाव एक है,भले भाषा अलग-अलग क्यों न हो? प्रभावित किसी से नहीं होना चाहिए,यही हिन्दी पत्रकारिता की आत्मा है।यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि कलकत्ता हिन्दी के संग पांच भाषाओं की पत्रकारिता की जन्मभूमि है।
पद्मश्री से सम्मानित डा.कृष्णबिहारी मिश्र की पुस्तक ‘हिन्दी पत्रकारिता:जातीय चेतना और खड़ी बोली साहित्य की निर्माण- भूमि’ आज तक एक हिन्दी पत्रकारिता की एक मानक -विश्वसनीय पुस्तक है।पत्रकारिता वही जो सबकी खबर लें और सबको खबर दें।
ये बातें हिन्दी पत्रकारिता की यात्रा के दो सौ वर्ष के पूर्ति के अवसर पर सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय के तत्वावधान में हिन्दी पत्रकारिता :अतीत एवं वर्तमान विषय पर आयोजित संगोष्ठी के मुख्य अतिथि व महात्मा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के प्रो.कृपाशंकर चौबे ने पुस्तकालय सभागार में कही।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार विश्वम्भर नेवर ने कहा कि संघर्ष की बुनियाद पर हिन्दी पत्रकारिता टिकी हुई है।तोप से ज्यादा प्रभावशाली अखबार होता है।हिन्दुस्तानियों के हित में निकली हिन्दी पत्रकारिता निरन्तर शुरू से लेकर आज तक सत्ता की चुनौतियों और संघर्षों से मुकाबला करती हुई आगे बढ़ रही है।
कलकत्ता प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार राज मिठौलिया ने कहा कि कलकत्ता हिन्दी पत्रकारिता की जननी रही है।अतीत के पत्रकारों के एक -एक शब्द में उनकी निष्ठा-साधना टपकती रहती थी।आज सोशल मीडिया के दौर में आज भी हिन्दी पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनी हुई है। वरिष्ठ पत्रकार सन्तन कुमार पाण्डेय ने कहा कि पत्रकार की एक विरल अन्तर्दृष्टि होती है।आजकल सम्पादक-सत्ता का अवमूल्यन हुआ है।एक जीवंत अखबार को जीवित रखना एक चुनौती है।
इस अवसर पर संस्था की मंत्री दुर्गा व्यास ने स्वागत भाषण दिया व सरस्वती वंदना कामायिनी पाण्डेय ने की।।संस्था के अध्यक्ष भरत कुमार जालान ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर डा. वसुमति डागा, महावीर प्रसाद बजाज,वंशीधर शर्मा,प्रेमकपूर,अशोक झा,जीवन सिंह ,रामकथावाचक पुरुषोत्तम तिवारी, ऋषि भूषण चौबे, रीमा पाण्डेय,रेशमी पांडा मुखर्जी,ऊषा जैन,शान्ति पाण्डेय, शकुन त्रिवेदी,अजयेन्द्रनाथ त्रिवेदी,योगेशराज उपाध्याय,अरुण प्रकाश मल्लावत,रवि प्रताप सिंह,गिरिधर राय,सुरेव शाॅ,परमजीत कुमार पंडित,कमल कुमार सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में पुस्तकालय के अध्यक्ष श्रीमोहन तिवारी , भगीरथ सारस्वत ,राहुल दास,लक्ष्मी जायसवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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