आपिस (ऑफिस) घर – बाहर की समस्याओं से संघर्ष करने की कहानी महिला सशक्तिकरण, सुनते ही ” या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता” लक्ष्मी रूपेण संस्थिता ” जैसे श्लोक दिमाग में गूंजने लगते है. महिला किसी जॉब में है तो घर से लेकर बाहर तक सभी को लगता …
Read More »संविधान और सेक्युलर शब्द
सोशलिस्ट और सेक्यूलर शब्द पर विवाद के मायने संविधान की प्रस्तावना में सोशलिस्ट सेक्यूलर शब्द पर इस समय सबसे सघन बहस चल रहा है। इमरजेंसी के 50 वर्ष पर आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबोले ने अपने भाषण में याद दिलाया कि जब …
Read More »गाथा की शान स्वाभिमान
—– हिन्द की सेना—– बर्फ चट्टानों पे एक हाथ संगीन दूजे हाथ तिरंगा रेतीले तूफानों में खड़ा बना फौलाद देश की सीमाओं मुश्तैद जवान।। नयी नवेली दुल्हन कर रही होती है इंतज़ार ईश्वर से आशीर्वाद मांगती बना रहे सुहाग।। बूढे माँ बाप की पथराई आँखे अपने सपूत का एकटक इंतज़ार …
Read More »फिर निकले प्रभु भक्तों से मिलने
हम सभी ” सर्वधर्म समभाव” वसुधैव कुटुंबकम् की विचारधारा के साथ चलते है- जिश्नु देव बर्मन न्यू बैरकपुर में स्थित बिस्वा सेवाश्रम संघ के प्रांगण में प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री जगन्नाथ प्रभु की रथयात्रा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तेलंगाना के राज्यपाल …
Read More »योग कर्म धर्म मर्म
योग– योग से निरोग योग से शक्ति भोग योग मार्ग बैराग्य मोक्ष योग अनुशासन आसान योग कर्म धर्म मर्म महात्म्य।। योग संयम जीवन संकल्प योग आत्म बल योग अन्तर्मन बैभव योग नित्य निरंतर योग व्यधि वध अंत।। कोरोना उन्नीस संक्रमण योग योग्य साथ हथियार योग से स्वस्थ प्रसन्न …
Read More »यह युद्ध किधर जा रहा है
अदृश्य शक्तियां ईरान को कभी पराजित नहीं होने देगी इजरायल ईरान युद्ध संपूर्ण विश्व को प्रभावित करने वाला है और भारत इसके परिणामों से किसी दृष्टि से अप्रभावित नहीं रह सकता। यह केवल तेल जैसे आर्थिक क्षेत्र में ही नहीं अन्य क्षेत्रों में भी इसके परिणाम दिखाई देंगे। 1979 की …
Read More »जिंदा इंसान
जिन्दा इंसान — बझे तीर में धार नहीं आती जंग खाई तलवार में मार नहीं आती।। जरुरी नहीं की सांसो धड़कन का आदमी इंसान जिन्दा हो! पुतला भो हो सकता है पुतलों के कदमो की चाल आवाज नहीं आती।। जिन्दा आदमी …
Read More »आग की लपटे
आग की लपटे ये आग की लपटें बड़ी ऊंची है, कहां से कहां पहुंच जाती है क्या क्या निगल जाती है मीलों की दूरी सेकेंड में तय कर आती है भयावह विनाश रच जाती है। जला जाती है सपनों …
Read More »मत छोड़ना लिखना तुम
मत छोड़ना लिखना तुम ………………………….. कवि! सुना है! अपनी ही जड़ों से उखड़ने लगा है आदमी, मैली हो गई हैं नदियाँ, हम काट रहे हैं जंगल, खिसकने लगी हैं पहाड़ की परतें और गमले में आ गया है वृक्ष! तेज, बहुत तेज हो गई है सूरज की तपिश! और बच्चों …
Read More »भीख में आबो-दाना नहीं चाहिए
तुझसे कुछ ऐ ज़माना नहीं चाहिए भीख में आबो-दाना नहीं चाहिए चाल टेढ़ी रखे और न सुधरे कभी उसके दिल में ठिकाना नहीं चाहिए तेरा चहरा नुमाइश न कर दे कहीं दर्द दिल में दबाना नहीं चाहिए हमसफ़र से इसे बाँटना ठीक है बोझ अकेले उठाना नहीं चाहिए हो मुबारक …
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