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राष्ट्रीय एकता में हिंदी की भूमिका

राष्ट्रीय पुस्तकालय, कोलकाता में द्विदिवसीय हिंदी कार्यशाला का भव्य शुभारंभ

 

*विविध भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ने वाली सशक्त कड़ी है हिंदी –डॉ तारा दूगड़*

 

कोलकाता, 4 जून। राष्ट्रीय पुस्तकालय, कोलकाता में आज द्विदिवसीय हिंदी कार्यशाला का भव्य उद्घाटन संपन्न हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रख्यात विदुषी डॉ. तारा दुगड़ थीं, जबकि अध्यक्षता राष्ट्रीय पुस्तकालय के महानिदेशक प्रो. अजय प्रताप सिंह ने की।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत वक्तव्य से हुआ, जिसे राष्ट्रीय पुस्तकालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग तथा हिंदी प्रकोष्ठ के प्रभारी डॉ. पार्थ सारथी दास ने प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी अतिथियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों का स्वागत करते हुए हिंदी के संवर्धन एवं कार्यालयी कार्यों में उसके प्रभावी प्रयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

 

कार्यशाला के प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. तारा दुगड़ ने “राष्ट्रीय एकता में हिंदी की भूमिका” विषय पर अपना सारगर्भित वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने हिंदी को देश की विविध भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ने वाली सशक्त कड़ी बताते हुए राष्ट्रीय एकता और भावनात्मक समरसता में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

 

द्वितीय सत्र में “संसदीय राजभाषा समिति के निरीक्षण” विषय पर हिंदी अधिकारी श्री संजीव कुमार सिंह ने विस्तृत चर्चा की। उन्होंने संसदीय राजभाषा समिति की कार्यप्रणाली, निरीक्षण की प्रक्रिया तथा राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक तैयारियों पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ विषय से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर संवाद भी किया।

 

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. ए. पी. सिंह ने राजभाषा संबंधी संसदीय समिति के आगामी निरीक्षण के महत्त्व को रेखांकित करते हुए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अधिकाधिक कार्य हिंदी में करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रशासनिक कार्यों में दक्षता और जनसंपर्क दोनों को सुदृढ़ बनाया जा सकता है।

 

कार्यक्रम में राष्ट्रीय पुस्तकालय के अनेक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यशाला का संयोजन एवं सफल संचालन अनुवाद अधिकारी श्री विनोद कुमार यादव ने किया। कार्यक्रम के प्रथम दिवस में हिंदी के प्रचार-प्रसार, राजभाषा नीति के क्रियान्वयन तथा संसदीय राजभाषा समिति के निरीक्षण से संबंधित विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

 

यह द्विदिवसीय कार्यशाला 5 जून तक चलेगी, जिसमें हिंदी के प्रयोग, राजभाषा नीति के क्रियान्वयन तथा प्रशासनिक कार्यों में हिंदी की उपयोगिता पर विभिन्न सत्र आयोजित किए जाएंगे।

 

 

 

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