अग्नि के गर्भ में पला होगा शब्द जो श्लोक में ढला होगा – डॉ शिव ओम अंबर

अपनी प्रखर लेखनी एवं ओजस्वी कविताओं के लिए विख्यात शिव ओम अंबर के सानिध्य में एक काव्य संगोष्ठी का आयोजन ‘जन संसार’ कार्यालय में किया गया।
कार्यक्रम का आरम्भ प्रणति ठाकुर ने सरस्वती वंदना से किया ततपश्चात डॉ शिव ओम अम्बर ने मन को आंदोलित करने वाली अनेक रचनाओं का पाठ किया तथा अंत में प्रभु राम के ऊपर ” बिना राम के आदर्शों का चरमोत्कर्ष कहां है, बिना राम के इस भारत में भारत में भारतवर्ष कहां है।” सुना कर श्रोताओं की वाहवाही लूटी।
यशस्वी कवि एवं साहित्यकार (IPS) मृत्युंजय कुमार सिंह ने “बिना रिंद के मयकदा क्या है,” एवं ” चमके जो मोती धरा के नयन में।” कविताओं को गा कर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश चौधरी ने हिंदी तथा संस्कृत में रचनाएं सुनाई।
कार्यक्रम के अध्यक्ष विशंभर नेवर ने चुटीले अंदाज में कहा ” अगर शाहजहां मारवाड़ी होता , करोड़ों न खर्च करता ताजमहल पर बल्कि सैकड़ों मुमताज ले आता करोड़ों के ब्याज पर।
कार्यक्रम में उपस्थित रचनाकारों ने भी अपनी रचनाओं को सुनाकर बंग भूमि पर हिंदी काव्य की अनुपम छटा बिखेरी – जैसे
दुर्गा व्यास : क्यों उदास बैठे हो चलो छत पर चलते है।।
कुसुम जैन: बरसती हैं बूँदें झूमते हैं पत्ते
पत्ता पत्ता जी रहा है पल पल को
आने वाले कल से बेख़बर
उर्वशी श्रीवास्तव :जीवन का हर रंग कच्चा है सिर्फ श्वेत ही सच्चा है
डाक्टर शिप्रा मिश्रा :दीये से दीये को जलाना कोई आपसे सीखे
जिन्दगी को सजाना कोई आपसे सीखे।।
रचना सरन: जन्मों के पुण्यों से मिला दर्शन मेरे श्री राम का,
चरणों में नत मस्तक करूं वंदन मेरे श्री राम का ।
*लखबीर सिंह निर्दोष: जगमगाते आँसुओं के अमूल्य मोती
ममता की खाली झोली भर भर जाते.
रीमा पांडे: चुभ गया था पांँव में उस ख़ार से लड़ती रही
जीत पाने के लिए मैं हार से लड़ती रही।
ज्ञान प्रकश पांडे : अगर परीक्षित बचे भी अब तो तुम्ही बताओं बचे भी कैसे इधर भी तक्षक उधर भी तक्षक .
रावेल पुष्प, शाहिद फरोगी, सुधा मिश्रा द्विवेदी, मीनाक्षी सांगनेरिया , फादर सुनील रोजेरिओ, गोपाल भित्रकोटि मीतू कनौडिया, रंजीत भारती
कार्यक्रम के अंत में शुभ्रा त्रिवेदी ने एक गीत सुनाया। आयोजक शकुन त्रिवेदी ने ” हां यहाँ तेजाबी बरसात है ” कविता सुनाई और कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालनन किया। मनोज त्रिवेदी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम में उपस्थित थे , समीक्षक प्रेम कपूर, श्रीमती सुशीला ओझा आदि
कार्यक्रम को सफल बनाने में शौर्यांक, शुभ्रा एवं सुमंत की अहम भूमिका थी।

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