गुरु हमारे —


आप ही जन्म जीवन सत्यार्थ
जनम लिया तब माँ रूप मे
ममता का आंचल आपकी
छाया कवच आशीर्वाद!!
दूजी तुम धन्य धीर धारा
जिस पर पग प्रथम से
अंतिम सांस ल!!
हाथ पकड़ती जननी
पग धरा धरनी पर
माता द्वय जननी जन्म
दायनी पग पथ जननी
जन्म भूमि हमारी!!
प्रथम गुरु दो पूज्य हमारे
नारी शक्ति सम्बन्धों रिश्ते
नातो का सन्दर्भ बताते हे
आदि शक्ति प्रथम गुरु द्वय
आपने जीवन संवारे!!
गांव नगर चौक चौराहा
सिंघासन से काधा ऊँचा
पिता गुरु द्वितीय हमारे!!
जीवन गुण अवगुण
राग द्वेष समय समाज
ज्ञान गुरु पिता हमारे!!
कैसे सफल विजयी सूत
संतान हो उनका धर्म मर्म
समाज राजनीती बताते!!
जननी, जन्मदाता, जननी
जन्मभूमि गुरु प्रथम द्वितीय
जीवन मर्यादा नैतिकता धन्य
धारा का समझाते!!
गुरु तृतीय कलम दावात
पटरी पूजा शब्द अक्षर ज्ञान
वेद धर्म कर्म कर्तव्य दायित्व
बोध ज्ञान विज्ञानं गुरु भगवान
बताते!!
गुरु चतुर्थ जन्म जीवन
रहस्य जीवन मोक्ष मौलिक
मूल्य प्राणी परमात्मा प्रकृति
आदि अनादि अनंत समझाते!!
गुरु तुम्ही ही भगवान
माँ रूप मे मातृभूमि
स्वरूप मे विश्वाश
आकाश पिता प्रतिबिम्ब!!
छरण नहीं होता जिसका
अक्षर अस्तित्व अहं बनाते
गुरु का जीवन गुरु से जीवन
गुरु ज्ञान विज्ञानं धर्म अध्यात्म
सार सारांश पढ़ाते दिखलाते!!
गुरु घर ग्राम से पूर्ण ब्रह्म
ब्रह्माण्ड गुरु जीवन मीत
गीत सुख दाता!!
दुःख पल भंवर से पार
लगता गुरु जन्म जीवन
पल प्रहर अतीत वर्तमान
भविष्य का मार्ग सिख
भाग्य सौभग्य हमारे!!
The Wake News Portal & Magazine