कुरुक्षेत्र की अंतिम ललकार भाग-2— देखो पार्थ तुम जागे युग जागा युग चेतना है लौटी।। कुरुक्षेत्र कि समर भूमि कटे मुंड काया से रक्तरंजित लथपथ है लज्जित।। कराहती अधर्म कि अंतिम सांसे अभी शेष महासमर का प्रेरक प्रणेता सरोवर छिपा अवशेष।। भीम प्रतिज्ञा का अंतिम पल भी है आने वाला …
Read More »कुरुक्षेत्र की अंतिम ललकार
कुरुक्षेत्र की अंतिम ललकार कुरुक्षेत्र कि अंतिम ललकार— देखो पार्थ तुम जागे युग जागा युग चेतना है लौटी।। कुरुक्षेत्र कि समर भूमि कटे मुंड काया से रक्तरंजित लथपथ है लज्जित।। कराहती अधर्म कि अंतिम सांसे अभी शेष महासमर का प्रेरक प्रणेता सरोवर छिपा अवशेष।। भीम प्रतिज्ञा का अंतिम …
Read More »अग्नि के गर्भ में पल होगा
07.12.2004 आज सवेरे से अलका की तबीयत ख़राब है, टॉन्सिल की पीड़ा है, बुख़ार है। विद्यालय से फ़ोन किया था, दीपा ने बताया कि विश्राम कर रही है – सौरभ ने कोई दवा लाकर दी है। कल बॉबी के जन्म-दिवस पर दीपा के साथ प्रेमा के यहाँ गया था, …
Read More »क्या मैं अतीत का पृष्ठ बन गया
क्या मैं अतीत का पृष्ठ बन गया हूं? दिनांक – 03.12.2004 दिन – शुक्रवार 1. टैक्सी वालों की हड़ताल के कारण कल वर्षों के बाद फ़तेहगढ़ से फ़र्रुख़ाबाद तक रिक्शे से जाना हुआ। चैराहे से भोलेपुर तक यात्रा एक रिक्शे से हुई, भोलेपुर से चैक तक दूसरे रिक्शे से जाना …
Read More »दिनचर्या भाग 2
दिनांक – 02.12.2004 दिन – गुरुवार 1. दिल्ली से शाहजहांपुर की यात्रा विष्णु के साथ हुई। ट्रेन कई घण्टे विलम्ब से थी। पुरानी दिल्ली के रेलवे प्लेटफार्म पर यह समय प्रतीक्षा-कक्ष में कटा। यात्रा में भी कई घण्टे लगे। विष्णु के कारण सब कुछ सुखद रहा। 2. शाहजहांपुर के आयोजन …
Read More »भगवान परशुराम का सर्वस्व दान –
भगवान परशुराम जी परब्रह्म विष्णु के छठे अवतार थे जो शिव भक्त एव त्यागी तपस्वी थे वे श्रेष्ठ गुरुओं में एक थे उनके शिष्य भीष्म द्रोण एव कर्ण ब्रह्मांड में सर्वश्रेष्ठ थे प्रस्तुत रचना प्रधुराम जी से सम्बंधित है जब विदेह प्रतिज्ञा के अनुसार भगवान राम ने भगवान शिव …
Read More »हे कान्हा
हे कांहा– हे कान्हा केशव माधव मधुसूदन युग मे जाने कितने नाम तुम्हारे।। आएं है ज़िंदगी मे जबसे तुम्ही बसे हर गम खुशी पल प्रहर में संग साथ हमारे।। हे कान्हा केशव माधव मधुसूदन युग मे जाने कितने नाम तुम्हारे।। पुकारे जब भी कोई हृदय से आए दौड़े सांझ सवेरे। …
Read More »‘‘दिनचर्या’’ मेरी डायरी
मेरी ग़ज़लें मेरी व्याख्या करेंगी- – डाॅ॰ शिव ओम अम्बर प्रीति गंगवार, फरुखाबाद, उत्तर प्रदेश द्वारा संकलित ‘‘दिनचर्या’’ मेरी डायरी हर रचनाकार के जीवन में, यदि वह डायरी लिखता है, तो उसका एक साहित्यिक महत्व भी हो जाता है क्योंकि उसका परिवेश ही शब्दों के वितान से आच्छादित होता …
Read More »प्यार का दीपक
दीप प्यार का जलाइए … दीप प्यार का जलाइए अंधेरा मिटाइये फरेब झूठ जंजाल का अन्धकार है बहुत दीप एक प्यार का जलाइए।। गर एक दिया भी जल गया दुनियां की इन्तज़ार की दुनियां रोशन जहाँ गुलज़ार सा अंधेरों से उजाले का लौ बनते जाईए।। कदम कदम पर …
Read More »भारतीय साहित्य में लोकतंत्र
‘भारतीय साहित्य में लोकतंत्र – एक संवाद’ भारतीय भाषा परिषद में आयोजित हुआ सफल आयोजन कोलकाता, 23 जून 2024 को भारतीय भाषा परिषद में ‘भारतीय साहित्य में लोकतंत्र’ – विषय पर एक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन भारतीय भाषा परिषद और सदीनामा प्रकाशन के सहयोग से किया …
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