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देश की एकता के लिए बलिदान दिया dr श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने

जवाहरलाल नेहरू विद्यापीठ ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई

 

कोलकाता (6 जुलाई 2026) : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर आज सोमवार को जवाहरलाल नेहरू विद्यापीठ (बॉयज़) हाई स्कूल में “स्मरणोत्सव” कार्यक्रम का आयोजन बड़े ही देशभक्तिपूर्ण वातावरण में किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मधुरिमा चंद्रा ने डॉ. मुखर्जी के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। इसके पश्चात सभी शिक्षकों ने बारी-बारी से पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

इस अवसर पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्रधानाध्यापिका मधुरिमा चंद्रा ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक महान शिक्षाविद्, कुशल प्रशासक और प्रखर राष्ट्रवादी थे। वे भारत की एकता और अखंडता के लिए आजीवन समर्पित रहे। धारा 370 के विरोध में उन्होंने “एक देश, एक विधान” का नारा दिया। उन्होंने कहा कि इसी सिद्धांत के लिए 1953 में डॉ. मुखर्जी ने बिना परमिट कश्मीर में प्रवेश कर सत्याग्रह किया और 23 जून 1953 को श्रीनगर में देश की एकता के लिए अपना बलिदान दे दिया।

कार्यक्रम में छात्रों ने भी डॉ. मुखर्जी के जीवन और विचारों पर अपने विचार व्यक्त किए। साथ ही छात्रों द्वारा बनाए गए डॉ. मुखर्जी के जीवन की विभिन्न घटनाओं पर आधारित चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे सभी ने सराहा।

इस सफल आयोजन में कौशिक साधुखान, नितेश्वर चौधरी, सुनीता राउत, गिरिजेश शर्मा, राजेश शर्मा, राजेंद्र रजक, मो. इब्राहिम, मृत्युंजय सिंह, सुमन कुमार दास, बब्लू सिंह आदि शिक्षकों का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का कुशल संचालन विनोद यादव ने किया।

 

 

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