बंगीय हिन्दी परिषद में मातृ दिवस

कोलकाता,11 मई। कोलकाता महानगर की प्राचीनतम संस्था ‘बंगीय हिन्दी परिषद ‘के तत्वावधान में आयोजित कवि कल्प गोष्ठी में अपने संबोधन में कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रख्यात साहित्यकार व पत्रकार डाॅ अभिज्ञात ने कहा कि मातृ दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं बल्कि माॅ के अनगिनत त्याग, समर्पण, स्नेह के प्रति व्यक्त करने का अवसर है। उन्होंने यह भी कहा कि माॅ अपने बच्चों की खुशियों के लिए स्वयं की इच्छाओं का त्याग कर देती है। मुख्य अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता शम्भुनाथ राय ने कहा कि हम अपने माता-पिता का सम्मान केवल एक दिन नहीं बल्कि जीवन भर करे।
विशिष्ट अतिथि दया शंकर मिश्र ने कहा कि वह बिना किसी अपेक्षा के हर परिस्थिति में परिवार का साथ निभाती है। यही कारण है कि माॅ को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है। कार्यक्रम की शुरुआत कोकिल कंठ की धनी प्रणति ठाकुर की सरस्वती वंदना से हुआ। इस पावन अवसर पर जिन्होंने माॅ पर रचनाएँ सुनाई उनमें सुरेन्द्र सिंह, कृष्ण कुमार दूबे, चन्द्रिका प्रसाद पाण्डेय ‘अनुरागी’,ओमप्रकाश चौबे, शिवम तिवारी, विश्वजीत ठाकुर, अय्यूब वारसी ‘कोलकतवी ‘,जतिब हयाल, सुरेश शाॅ, पूर्णिमा जायसवाल, लक्ष्मी कुमार जायसवाल, श्रीकांत गलुई, नीतू शर्मा, रवि पारख, संजय शुक्ल, राम नारायण झा, नजीर राही, डाॅ शाहिद फरोगी, डाॅ राजन शर्मा, शहनाज रहमत, विजय इससर ‘वत्स ‘ने कविताएँ सुनाकर भाव-विभोर कर दिया।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रदीप कुमार धानुक जबकि धन्यवाद ज्ञापन कमल पुरोहित ‘अपरिचित ‘ने किया।
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