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एक देश में ‘ दो प्रधान, दो विधान, दो निशान नहीं चलेंगे

डाॅ मुखर्जी का जीवन बलिदान में प्रकट होता है- ब्रजेश

 

हावड़ा, 06 जुलाई। पश्चिम बंगाल की स्वनामधन्य संस्था ‘सलकिया हिन्दी साहित्य गोष्ठी ‘के तत्वावधान में डाॅ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती का पालन बांधाघाट के श्री हनुमान पुस्तकालय में मनायी गई। इस महत्वपूर्ण अवसर पर कार्यक्रम अध्यक्ष व चीफ विजिलेंस अधिकारी ‘कोल इण्डिया ‘ब्रजेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि डाॅ मुखर्जी जम्मू-कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग भी बनाना चाहते थे। वे भारत की अखण्डता के प्रबल पक्षधर थे। उनका प्रसिद्ध नारा था-एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान नहीं चलेंगे। डाॅ मुखर्जी का जीवन संदेश देता है कि सच्चा राष्ट्रवाद केवल शब्दों में नहीं बल्कि बलिदान में प्रकट होता है।मुख्य अतिथि डाॅ गिरिधर राय ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि 1934 में मात्र 33 वर्ष की आयु में वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति भी बने। उन्होंने उच्च शिक्षा के विस्तार और सुधार के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। दूसरे सत्र में कविताओं का दौर शुरू हुआ जिनमें नन्द लाल सेठ ‘रौशन ‘,सत्य प्रकाश तिवारी, रणजीत भारती, शबाना सैयद, कमलापति पाण्डेय निडर,वंदना पाठक, राम नारायण झा ‘देहाती ‘,जतिब हयाल, अय्यूब वारसी ‘कोलकतवी ‘,अजय तिवारी, धर्म देव सिंह, डाॅ उर्मिला साव ‘कामना ‘,कमल पुरोहित ‘अपरिचित ‘,ऊषा जैन, भारती मिश्र, रामाकांत सिन्हा ‘सुजीत ‘,मीतू कानोडिया,चन्दभानु गिरिजाशंकर कलावती, विजय इससर ‘वत्स ‘,विश्वजीत ठाकुर, प्रणति ठाकुर, चित्रा राय ‘श्रीकृष्णवी ‘,ब्रजेश कुमार त्रिपाठी, डाॅ गिरिधर राय ने भावपूर्ण रचनाएँ सुनाकर डाॅ मुखर्जी को याद किया गया स्वागत वक्तव्य संयोजक डाॅ मनोज मिश्र ने दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रदीप कुमार धानुक व धन्यवाद ज्ञापन चन्द्रिका प्रसाद पाण्डेय ‘अनुरागी ‘ने किया।

 

प्रदीप कुमार धानुक

स्वतंत्र पत्रकार व कवि

74398-82266

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