एक बार और जाल फेंक रे मछेरे, जाने किस मछली में बंधन की चाह हो!’ अचानक रवि ( रवि प्रताप सिंह अध्यक्ष, शब्दाक्षर ) का रात में फोन आया और बोला ; ” दीदी कल डॉ बुद्धिनाथ मिश्र जी आ रहे है, आपको कार्यक्रम में आना है! ” उसकी बात …
Read More »शांति की संभावना
मणिपुर में शांति की ठोस संभावना
Read More »मां आओ मेरे द्वार
माँ आओ मेरे द्वार माईया पधारों घर द्वारे भक्तों का इंतज़ार है।। घर घर तेरा मंडप सजा है माईया के स्वागत का दिन रात है।। माईया तेरे रूपों का संसार माईया तू ही अवनि अवतार पर्वत बाला बुद्धि बृद्धि स्वर संसार । माईया पधारो घर द्वारे …
Read More »आदि शक्ति अम्बे जगदंबे
आदि शक्ति अम्बे जगदम्बे हे देवी माँ हे देवी माँ ★★★★ तू भय भव भंजक जगत कल्याणी है ● दुष्टो की दुर्गा काली भक्तो की रखवाली है ● शक्ति दे मुझे अपनी भक्ति का भाव भाग्य दे !! माँ शारदेय मैं आया तेरे द्वार तुझे पुकारते …
Read More »एकदंत गजमुख लंबोदर
गणपति-वंदन ऊँ जय गणपति धरैं सुवेशा, हरहु पाप-त्रैताप कलेशा । अति मनहर छवि नैन विशाला, ध्यावैं विधि-हरि-हर त्रैकाला । शेष दिनेश सुरेश खगेशा , पूजें सुर नर असुर नरेशा। ऊँ जय गणपति धरै सुवेशा, हरहु पाप- त्रैताप कलेशा।।(1) एक दंत गजमुख लम्बोदर, शेष वदन नर वर अति …
Read More »उम्मीद की तरफ लौटना तुम
‘उम्मीद की तरह लौटना तुम’ कविता संग्रह- ‘उम्मीद की तरह लौटना तुम’ लेखक- पंकज सुबीर, समीक्षक- शैलेन्द्र शरण प्रकाशक : शिवना प्रकाशन, सीहोर (म.प्र.) मूल्य- 300 रुपये, वर्ष- 2025, पृष्ठ- 184 मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों, पीड़ा और पुनर्जीवन की आकांक्षा का दस्तावेज़ पंकज …
Read More »हे कान्हा ,केशव, माधव ,मधुसूदन
कान्हा— हे कान्हा केशव माधव मधुसूदन, युग में जाने कितने नाम तुम्हारे।! आया हूँ जीवन में जबसे तुम्ही बसे हर गम खुशी पल प्रहर में संग साथ हमारे।! पुकारे जब भी कोई हृदय से, आए दौड़े सांझ सवेरे! समय का कोई नहीं है बंधन, प्रेम भाव ही …
Read More »सारे जहां से अच्छा
सारे जहां से अच्छा भारत देश हमारा– सारे जहां से प्यारा यह देश है हमारा भारत है जिसको कहते दुनियां सबसे न्यारा।। माटी है जिसकी पावन माता जिसे हम कहते बेटियां यहाँ कि देवी नारी को पूजते।। बच्चा बच्चा है जैसे राम कण कण हैं बसते कंकड़ …
Read More »अरमानों के आसमान पर लहराता तिरंगा
अरमानों के आसमान पर लहराता — अरमानों के आसमान पे लहराता जन गण मन कि शान वंदे मातरम का सम्मान भारत का अभिमान।। गंगा की धाराओं की कल कल कलरव की आवाज सत्य अहिंसा का गांधी जय जवान जय किसान।। अरमानों के आसमान पे लहराता जन गण मन …
Read More »अंधकार में हम साहस का दीप जलाते है
भारत माता का वंदन अंधकार में हम साहस के,दीप जलाते हैं। आज़ादी के मधुर तराने,नित हम गाते हैं।। चंद्रगुप्त की धरती है यह,वीर शिवा की आन है। राणाओं की शौर्य धरा यह,पोरस का सम्मान है।। वतनपरस्ती तो गहना है,हृदय सजाते हैं। आज़ादी के मधुर तराने,नित हम गाते हैं।। …
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