रक्षाबंधन

त्योहार है यह राखी का

त्योहार है यह राखी का
बहन कैसी भी हो अच्छी होनी चाहिए
भले बुरे सभी भावों में बहना या बेटी की गलती
भाई बेटा कुछ भी करे सीखे बहना सिर्फ सहना ही
प्रेम करे प्यारे भाई से
प्रश्न उठता रहा सदैव ही
क्या उस धागे मात्र से ही
रक्षा किसी की हो पाएगी
समय के साथ राखी भी
बाजारवाद से जा टकराई हैं
कौन सी बहन कितने की
राखी लाई है उसने कौन सा दायित्व निभाया
विवाह बाद और पहले में अंतर खूब समझ में आता
उपहारों और रूपयों पैसे से प्रेम को तौला जाता
मन से वह बचपन की बातें कब की रफूचक्कर हो जातीं
मैली कुचैली यादें अहंकार में पलती रहतीं
बहना भाई से और भाई बहना से दूर दूर ही रहते
वे बीती बातें आपस की कभी नहीं कर पाते
यह एक इवेंट सा लगता खानापूर्ति का बहाना बनता
हर त्योहारों की एक समाप्ति तारीख होती है
साल भर में एक दिवस बन कर आते हैं
रिश्तों की इस मिठास में कड़वाहट भी अपना रंग दिखाते
अच्छा बुरा सभी मिलकर मनुष्य भाव बनते रहते
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