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30 मई को विवेकानन्द सेवा सम्मान

30 मई को विवेकानन्द सेवा सम्मान 2026

 

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज

कोलकाता, 25 मई। कोलकाता महानगर की सुप्रसिद्ध साहित्यिक-सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था श्री बड़ाबाजार
कुमारसभा पुस्तकालय द्वारा प्रवर्तित इस वर्ष का  ;विवेकानन्द सेवा सम्मान' दिव्यांग मुक्त भारत अभियान के
सूत्रधार, अध्यात्म के शिखर पुरुष, भारतीय संस्कृति एवं सनातन परम्परा के संवाहक तथा परमार्थ निकेतन (ऋषिकेश)
के यशस्वी संस्थापक-अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को सांस्कृतिक-आध्यात्मिक चेतना के
संवद्र्धन एवं मानवीय मूल्यबोध को जागृत करने हेतु अहर्निश सेवा कार्यों के लिए आगामी शनिवार 30 मई 2026
को सायं 4 बजेे नेशनल लाइब्रोरी सभागार में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किया जायेगा।
"हम व्यक्ति की अक्षमता को नहीं, बल्कि उसके भीतर छुपी "दिव्यता' और क्षमता को पहचानें'– इस मंत्र से मानवता
की सेवा करने वाले हम सबके श्रद्धेय आध्यात्मिक गुरु स्वामी चिदानंदजी सरस्वती (अध्यक्ष : परमार्थ निकेतन,
ऋषिकेश) "दिव्यांग मुक्त भारत अभियान' के सूत्रधार है। स्वामीजी का मानना है कि यह कोई शारीरिक सहायता नहीं
है बल्कि दिव्यांग भाई बहनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर एवं सम्मानित जीवन देने का
महत् प्रयास है। स्वामीजी के मार्गदर्शन में "डिवाईन शक्ति फाउन्डेशन' एवं "महावीर सेवा सदन' के संयुक्त सहयोग से
इस सेवा का प्रारंभ वर्तमान में उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में किया गया है। इसके
लिए एक मोबाइल फैक्ट्री (चलती फिरती कार्यशाला) का उपयोग किया जाता है जिससे मौके पर ही उपकरणों को फिट
कर भाई-बहनों को समानता एवं सम्मान पूर्वक जीवन जीने का संबल प्राप्त हो। प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान
परमार्थ निकेतन शिविर में इस अभियान के माध्यम से हजारों लोगों की सेवा की गई। मानवता एवं पर्यावरण के
संरक्षण में समर्पित, संस्कृत एवं दर्शनशास्त्र के ज्ञाता, एकता सद्भाव के परमपोषक स्वामी चिदानंद सरस्वती जी को
मात्र 8 वर्ष की अल्पायु में सद्गुरु की कृपा प्राप्त हुई। ई·ार की महिमा का अंत:करण में एहसास होने पर आपने
युवावस्था में एक वर्ष मौन साधना के पश्चात् हिमालय में मौन एवं ध्यान साधना की। मात्र 12 वर्ष की आयु में
कठोर साधना के उपरांत गुरु के आदेश पर शैक्षणिक ज्ञानार्जन हेतु जंगल से वापस लौटे एवं संस्कृत व दर्शनशास्त्र
की शिक्षा के साथ अनेक भाषाओं में वैचारिक अभिव्यक्ति की क्षमता प्राप्त की। आध्यात्मिक धर्मगुरु एवं प्रेरणा-
पूज्य स्वामीजी परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के परमाध्यक्ष; गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता; ग्लोबल इण्टर फेथ वाश
एलायंस (जीवा) के सह-संस्थापक अध्यक्ष तथा भारतीय संस्कृति शोध प्रतिष्ठान के संस्थापक हैं। आध्यात्मिक गुरु की
भूमिका के रूप में उनके मानवतावादी कार्यों के लिए पूज्य स्वामी जी को अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।
कुमारसभा पुस्तकालय ने 1987 ई. में पूज्यपाद स्वामी विवेकानन्द की 125वीं जयन्ती के अवसर पर स्वामीजी के
आदर्शों के अनुरूप समाजसेवा, संस्कार एवं सामाजिक पुनरुत्थान के लिए समर्पित व्यक्तियों/संस्थाओं हेतु इस वार्षिक
सम्मान का प्रवर्तन किया था। प्रथम सम्मान नागालैंड की रानी गाइदिनल्यु को एवं गत वर्ष का सम्मान पश्चिम
बंगाल के हिन्दू ह्मदय सम्राट पद्मश्री स्वामी प्रदीप्तानन्द जी (कार्तिक महाराज) को समर्पित किया गया था।

(महावीर प्रसाद बजाज, अध्यक्ष)

 

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