Friday , May 1 2026

धरती धोरा री

*पढ्यौ है पण गुण्यौ कोनी*

 

आज पोतौ दादी ने पूच्छ्यौ– दादीसा, लोग केवै पढ़्या लिख्या ग्यानी हुवै, पढ़्यै लिख्यै रै च्यार आंख्या हुवै फिर केई जणा मौकळी डिगरी धारियां ने पढ़्या लिख्या मूरख क्यूं बोलै। दादी बोली– पढ़्यै लिख्यै में गुण नहीं हुवै तो लोग गुण बायरौ ही समझै। कबीरदास जी क्यूं कयौ–पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय। मतलब पूजा गुणां री हुवै और पूछ भी गुणां री हुवै। रोहीड़ै रौ फूल घणो ई फूटरौ हुवै पण बीं में सुगंध कोनी हुवै। इण वास्तै रूप रड़ौ गुण बायरौ रोहीड़ै रौ फूल। दुनिया में घणा ई है जकां वास्तै कैबत चालै–

गुण बिन करै गरूर, बळ बिन बोले आकरौ।

लोग डिगरियां रै पाण ऊंचे औधां पर तो पूग ज्यावै पर शालीनता, समझदारी, निमळाई, निरअहंकारीपण रा गुण कोनी अंगेजै कर करड़ाई धार ओगणगारो बण ज्यावै। गुणी आदमी नै समै, काळ, परिस्थिति री समझ हुवै। ऄक कैबत चाले–

गुण बिन ठाकर ठीकरो, गुण बिन मीत गंवार।

गुण बिन चंदन लाकड़ी, गुण बिन नार कुनार।

स्याणा आदमी कही है– गुणी आदमी चतुर हुवै, नेकी पर चालै और नेक सलाह देवै। जठै घणा ओगणगारा बसै बठै वास नहीं करणौ। राजिया रौ ऄक दूहाळौ है–

गुण अवगुण जिण गांव, सुणै न कोई सांभळै।

उण नगरी बिच नांव, रोही आच्छी राजिया।

कैवणै रौ मतलब है जिण गांव में गुण औगण री समझ नहीं हुवै, बीं नगरी री बजाय तो जंगल में बसणौ चोखो। किताई सास्तर पढ़ेड़ा हुवै अर गुणा़ं रौ अभाव हुवै तो उणारी तुलना गरदभ पर लदेड़ै चंदण सूं करै। जके नै चंदण रै बोझ रौ तो ठा पड़ै पण बीं रा गुणां नै कोनी बूझै। सु्श्रुत रै सिलोक रौ उथळौ है–

चंदण लदियौ रासभौ, के समझै चंदण सार।

सास्तर पढया यूं मौकळा, मूढ़ फिरै संसार।

मतलब पढ़े लिखे में गुणां रै होवणै सूं बीं री पूछ अर आदर हुवै।

– बंशीधर शर्मा

About Shakun

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *