हत्यारे
Shakun
December 20, 2025
Literature
187 Views
हत्यारे

कितना आसान होता है किसी अकेले को सैकड़ों की तादाद में घेर कर मारना
किसी की बेबसी – बेचारगी पर ठहाका लगाना
ठहाका लगाना, नारे लगाना और अपनी सफलता पर यू मुस्कुराना
जैसे किया है बहुत बड़ा काम, बहुत बड़ा काम ।
अब तो आना पड़ेगा ऊपर से उतर कर तुम्हे सर्वशक्तिमान
आना ही पड़ेगा क्योंकि तुम्हारी ही इच्छा को दिया है अंजाम
अभी भी दे रहे है अंजाम बढ़ाया है तुम्हारा ही नाम
तुम्हारी ख़ुशी के लिए ही सहेंगे जेल, यातना और अपमान।
शिकायत है मुझे तुमसे और पूछना भी है तुमसे
हिंसा कब रास आयी थी तुमको ,
कब तुमने सताया था मासूमो को
कब दिया था तुमने अधर्म का साथ
फिर क्यों ये निर्मम हत्याएं और हँसते हुए हत्यारें
जोश में डूबे जघनता पर वारें ।।
– शकुन त्रिवेदी