आचार्य विष्णुकान्त शास्त्री स्मृति व्याख्यानमाला
*जातिवाद से ऊपर उठकर राष्ट्र भाव जगायें : डॉ. शिवओम अम्बर*

कोलकाता, 17 मई। “राष्ट्र को परम वैभव पर ले जाने के लिए हमें जातिवाद से ऊपर उठना होगा। हमारी संस्कृति में अन्तर्निहित पांच प्राण तत्व हमें समाज एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण के संस्कार प्रदान करते हैं।
सनातन संस्कृति के पांच प्राण हैं- पंचयज्ञ, चार वर्णाश्रम, चार पुरुषार्थ, षोडस संस्कार, कर्म सिद्धांत। –ये उद्गार हैं प्रख्यात राष्ट्रवादी चिंतक एवं प्रभावी वक्ता डॉ. शिवओम अम्बर (फर्रूखाबाद) के, जो श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय द्वारा स्थानीय रथीन्द्र मंच (जोड़ासाँको ठाकुरबाड़ी) में रविवार 17 मई 2026 को आयोजित आचार्य विष्णुकान्त शास्त्री स्मृति व्याख्यानमाला के इक्कीसवें आयोजन के अंतर्गत “सनातन संस्कृति के पाँच प्राण’ विषय पर बतौर प्रधान वक्ता बोल रहे थे।
डॉ. अम्बर ने सनातन संस्कृति के बारे में समाज में फैली भ्रांतियों के निवारण हेतु नई व्याख्याएं परिभाषित करते हुए बताया कि ब्रह्म यज्ञ यानि परावाणी का स्वाधयाय तथा पितृयज्ञ यानि अपने समपर्कित व्यक्तियों का ध्यान रखना है। वर्णाश्रमों को उन्होंने छात्र जीवन, घर का संरक्षक, समाज संरक्षक एवं समर्पण की भूमिका में बांटा तथा चार वर्णों को शिक्षक, रक्षक, पोषक एवं परिपोषक के रूप में परिभाषित किया। वर्तमान परिस्थिति में षोडस संस्कार की जगह अन्नप्रासन, नामकरण, उपनयन, पाणिग्रहण एवं अन्तेष्टि संस्कार को आवश्यक बताया। कर्म सिद्धांत केवल भारतीय संस्कृति में है जो हमें अपने कर्मों के द्वारा सद्गति (मोक्ष) का मार्ग प्रशस्त करता है।
समारोह के अध्यक्ष संस्कृति पुरुष डॉ. बिट्ठलदास मूंधड़ा ने अपने वक्तव्य में आत्मबोध, गंतव्यबोध एवं शत्रुबोध जैसे आवश्यक तत्वों की तरफ ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि हमें कहा जाना है और क्या करना है यह तय करना चाहिए तथा अपने अहं को छोड़कर राष्ट्र एवं समाज के लिए एकजुट होने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के आरंभ में “संस्कृति सबकी एक चिरंतन….’ गीत की सस्वर प्रस्तुति दी युवा गायक श्री अमित पटवा ने। स्वागत भाषण दिया पुस्तकालय के अध्यक्ष श्री महावीर बजाज ने तथा कल्याण मंत्र का पाठ किया श्री अमित ओझा ने। कार्यक्रम का कुशल संचालन किया कुमारसभा की साहित्य मंत्री डॉ. तारा दूगड़ ने।
अतिथियों को अंग वस्त्र पहना कर स्वागत किया डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी एवं ज्योतिषाचार्य राकेश कुमार पाण्डेय एवं रितिका काकड़ा ने। कुमारसभा के मंत्री बंशीधर शर्मा एवं उपाध्यक्ष श्री महावीर प्रसाद रावत भी मंच पर उपस्थित थे।
डॉ. शिवओम अंबर की 75वें वर्षपूर्ति पर पुस्तकालय की ओर से माला पहनाकर सम्मान किया डॉ. राजीव रावत (आई.आई.टी., खड़गपुर) ने, शॉल ओढाया डॉ. बिट्ठलदास मूंधड़ा ने एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किया श्री महावीर बजाज एवं श्री बंशीधर शर्मा ने।
कार्यक्रम में स्थानीय कवयित्री श्रीमती मितु कानोड़िया के प्रथम काव्य संग्रह “ह्मदय पुष्प’ का लोकार्पण डॉ. शिवओम अम्बर द्वारा किया गया ।
समारोह में सर्वश्री रामअवतार बींजराजका, अजय नन्दी, मनोज पराशर, महेश तोदी, राजकुमार व्यास “काकू’, अरुणप्रकाश मल्लावत, संजय रस्तोगी, ब्राहृानन्द बंग, सागरमल गुप्ता, सत्यप्रकाश राय, वेदप्रकाश गुप्ता, नरेन्द्र डागा, महेन्द्र अग्रवाल, राजीव शरण, सुभाष जैन, शंकरलाल सोमानी, गुड्डन सिंह, डॉ. कमल कुमार, बिधुशेखर शास्त्री, डॉ. सत्या उपाध्याय, स्नेहलता वैद, शकुन त्रिवेदी, सविता पोद्दार, प्रदीप सूंठवाल, राजू लाठ, रामकेश सिंह, रश्मि पाण्डेय, तेज बहादुर सिंह, रामपुकार सिंह, भोला सोनकर, संजय मंडल, सुशीला चनानी, राजेश अग्रवाल “लाला’, दयाशंकर मिश्र, सावित्री रावत, अलका पाण्डेय, डॉ. ऋषिकेश राय, महेश केडिया, चन्द्रकुमार जैन, मनोज काकड़ा, रामचन्द्र अग्रवाल, दीपक कच्छावा, इन्दु चांडक एवं गायत्री बजाज आदि की गरिमामयी उपस्थिति से सभागार खचाखच भरा हुआ था।
कार्यक्रम को सफल बनाने में सर्वश्री भागीरथ सारस्वत, मनीष जैन, श्रीमोहन तिवारी, बिपुल दूगड़, बृजेन्द्र पटेल एवं अरुण सिंह आदि सक्रिय थे।
– महावीर बजाज, अध्यक्ष
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