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प्रेमचंद्र को क्यों पढ़े

प्रेमचंद का साहित्य सामाजिक चेतना का जीवंत दस्तावेज़ : डॉ. बृजराज सिंह

 

 

कोलकाता, 3 अगस्त। उमेशचंद्र कॉलेज, कोलकाता के हिंदी विभाग तथा आंतरिक गुणवत्ता मूल्यांकन समिति (IQAC) के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को कॉलेज के सेमिनार कक्ष में ‘प्रेमचंद को क्यों पढ़े’- राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

संगोष्ठी में वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता, सामाजिक सरोकारों तथा मानवीय मूल्यों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।कार्यक्रम का शुभारंभ महान कथाकार प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

अध्यक्षीय संबोधन में कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. मो. तफ़ज्जल हक़ ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। उनकी रचनाएँ सामाजिक विषमताओं, मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति हैं तथा नई पीढ़ी को सामाजिक उत्तरदायित्व का बोध कराती हैं।संगोष्ठी के बीज वक्तव्य एवं स्वागत भाषण में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. कमल कुमार ने कहा कि प्रेमचंद ने हिंदी कथा-साहित्य को यथार्थवादी दृष्टि प्रदान करते हुए साहित्य को जनजीवन से जोड़ा। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल साहित्यिक धरोहर नहीं, बल्कि भारतीय समाज का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दस्तावेज़ भी है।

मुख्य वक्ता दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट, आगरा के हिंदी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. बृजराज सिंह ने ‘प्रेमचंद को क्यों पढ़ें’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि प्रेमचंद का साहित्य मानवीय संवेदना, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय चेतना का जीवंत दस्तावेज़ है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रेमचंद की रचनाएँ पहले से अधिक प्रासंगिक हैं और विद्यार्थियों को उनके साहित्य का गंभीर अध्ययन करना चाहिए। बांग्ला विभाग की डॉ. सोनाली चक्रवर्ती ने बांग्ला साहित्य और समाज में प्रेमचंद की लोकप्रियता तथा उनके साहित्य के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए भारतीय भाषाओं के मध्य साहित्यिक संवाद की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर कॉलेज की पुस्तकाध्यक्ष डॉ. कावेरी कर्मकार द्वारा प्रेमचंद पर आधारित प्रसार भारती संग्रहालय के एक वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया, जिसे उपस्थित विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने अत्यंत रुचि के साथ देखा। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन डॉ. ज्योति पासवान ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. मर्सी हेम्ब्रम ने प्रस्तुत किया। संगोष्ठी में कॉलेज के शिक्षक, शिक्षाकर्मी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।

आयोजन को सफल बनाने में डॉ. अरूप बख्शी, प्रो. बसंत बर्मन, प्रो. पूजा मुखर्जी, प्रो. स्रोतोस्विनी डे, रोहन रजक, अमन गुप्ता, शैलानिल भौमिक, कुलजोत सिंह, अनुज कुमार पंडित, कौशिक जायसवाल सहित अनेक शिक्षकों एवं सहयोगियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

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