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श्री भरत धर्म के साक्षात स्वरूप

*श्री भरत धर्म के साक्षात स्वरूप हैं: आचार्य मृदुल कांत शास्त्री*

कोलकाता, 4 जून। कोलकाता के स्टेडल बैंक्वेट में पूर्वांचल कल्याण आश्रम द्वारा आयोजित श्रीराम कथा के पांचवें दिन श्रद्धा का माहौल रहा। यह कथा दक्षिण बंगाल के पांच छात्रावासों के नवीनीकरण एवं विस्तार योजना को समर्पित है। पूज्य आचार्य श्री मृदुलकांत शास्त्री जी ने अपने ओजस्वी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कथा में चित्रकूट के हृदयस्पर्शी श्रीराम-भरत मिलन प्रसंग को सुनकर श्रोताओं की आंखें नम हो गईं। महाराज जी ने कहा कि श्री भरत त्याग, प्रेम, मर्यादा और धर्म के साक्षात स्वरूप हैं, जिनका चरित्र मानव जीवन के लिए आदर्श प्रेरणा है। उन्होंने रेखांकित किया कि रामकथा केवल भगवान राम की कहानी नहीं, बल्कि सत्य, सेवा, त्याग और कर्तव्य के मार्ग पर चलकर आदर्श जीवन जीने की कला सिखाती है।
कार्यक्रम में मुख्य यजमान राजेश-सीमा गुप्ता, दैनिक यजमान सचिन मित्तल, प्रसाद यजमान सरोज ढांढरिया व कमल किशोर रुंगटा और श्रृंगार यजमान मधु झंवर ने विधिवत व्यासपीठ पूजन किया। इस अवसर पर संगठन के पदाधिकारी, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
उत्तर हावड़ा महिला समिति की बहनों ने उद्बोधन गीत प्रस्तुत किया, जबकि मंच संचालन श्रीमती शशी मोदी ने किया। कार्यक्रम का समापन मंगल आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।

 

 

 

 

 

 

 

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