आदर्शवाद एवं यथार्थवाद के प्रतीक हैं प्रेमचंद के नायक : डॉ. बृजराज सिंह

कोलकाता, 2 अगस्त। प्रेमचंद की रचनाओं में गरीबी और संघर्षमय जीवन का यथार्थ बोध झलकता है। उनके रंगभूमि उपन्यास का शतवर्ष मनाना गर्व का विषय है तथा वर्तमान में भी प्रेरणा प्रदान करने वाला है। इसमें एक कृष्काय जन्मांध व्यक्ति को उपन्यास का नायक बनाकर पूंजीवाद एवं समाजवाद के शोषण के विरुद्ध एक आवाज उठाने का उद्देश्य निहित था जो स्वतंत्र भारत में आज भी दिखाई देता है। तत्कालीन आजादी के आंदोलनों से अप्रभावित वे ह्मदय परिवर्तन व्यवस्था के समर्थक थे। उनके लेखन में चेतना का चित्रण था जो वर्तमान में भविष्य की दृष्टि रखता है। वे एक ऐसा समाज बनाने में अपनी भूमिका को निभाना चाहते थे जिसमें सब मनुष्य बराबर, नैतिक गुणों से संपन्न, सद्भावी एवं मानवतावादी हो। — ये उद्गार हैं दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट, आगरा के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. बृजराज सिंह के, जो श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय के तत्वावधान में रविवार को पुस्तकालय कक्ष में आयोजित “प्रेमचंद का कथा साहित्य : राष्ट्रीय संगोष्ठी’ में प्रधान वक्ता के रूप में बोल रहे थे।
विशिष्ट वक्ता काजी नजरूल विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. काजू कुमारी साव ने अपने वक्तव्य में कहा कि प्रेमचंद ने अपनी कहानियों में जीवन के संघर्षों के अनुभवों को रेखांकित किया है। उनकी रचनाओं में विचारों का बदलाव, ईमानदारी, नैतिकता, जन-समस्या, मानवीय संवेदनाओं तथा दुख-सुख का चित्रण मिलता है।
कुमारसभा पुस्तकालय के अध्यक्ष श्री महावीर प्रसाद बजाज ने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि उपन्यास सम्राट प्रेमचंद केवल साहित्यकार ही नहीं थे बल्कि समाज सुधारक भी थे। भविष्य द्रष्टा के रूप में उन्होंने अपनी कहानियों के माध्यम से हम सबको चेताने का प्रयास भी किया है।
कुमारसभा के मंत्री श्री बंशीधर शर्मा ने अपने स्वागत भाषण में बताया कि पुस्तकालय में प्रेमचंद का प्रचुर साहित्य उपलब्ध है। फरवरी 1954 में पुस्तकालय द्वारा आयोजित प्रेमचंद जयंती में शिवरानीदेवी प्रेमचंद का उपस्थित रहना हम सबके लिए गौरव का विषय रहा है।
कार्यक्रम के आरंभ में श्री विवेक तिवारी ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का कुशल संचालन किया डॉ. कमल कुमार ने तथा कल्याण मंत्र से श्री सत्यप्रकाश राय ने समापन किया। अतिथियों का स्वागत किया श्री अजयेन्द्रनाथ त्रिवेदी एवं श्री भागीरथ सारस्वत ने।
समारोह में सर्वश्री नन्दकुमार लढ़ा, सीताराम तिवाड़ी, भानुप्रताप मिश्र, रमाकांत सिन्हा, बृजेन्द्र पटेल, गुड्डू दूबे, ज्ञानप्रकाश पाण्डेय, डॉ. अर्जुन ठाकुर, डॉ. अभिलाषा पाण्डेय, सर्वदेव तिवारी, विजयशंकर पाण्डेय, बेदप्रकाश गुप्ता, मीतू कानोड़िया, रामकेश सिंह, पूजा प्रसाद, पद्माकर व्यास, अनुराग शुक्ला, श्रीमोहन तिवारी, आरती जयसवाल, चन्द्रकुमार जैन, अरविन्द तिवारी, जीवन सिंह, गायत्री बजाज एवं अरुण कुमार सिंह प्रभृति विशेष रूप से उपस्थित थे।
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