Tuesday , August 4 2026

 मेरे प्यारे दादा जी

            बाल कविता

प्यारे दादा जी, सबसे अच्छे दादा जी

रावेल पुष्प

मेरे प्यारे दादा जी, सबसे अच्छे दादा जी

मम्मी बोले शैतान हूँ मैं,दादा बोलें- लाडो जी

सुबह-सुबह जब खुलती आंख,

दादा जी मुझको गोदी ले लेते

हॅंसते-हँसते वे खूब खिलाते

 गालों पर मीठी पप्पी दे देते

 

ऊँगली पकड़ के चलना सीखा

गिरना, हँसना, पलना सीखा

जब मैं थोड़ी गिर-गिर जाती

दादा कहते – कुछ ना होता

 

घोड़ा बनके पीठ चढ़ाकर दौड़ें

धप-धप, धप-धप, आगे जाते

मैं भी हँस-हँस ताली बजाती

 घर वाले मुझको कितना भाते

 

पार्क ले जाकर झूला झुलवाएँ,

रंगीन चिड़िया,तितली मुझे दिखाएँ

कभी-कभी आइसक्रीम  दिलाएँ

पर मम्मी से,फिर ये बात छुपाएँ

 

रात को कितनी कहानियां सुनाते

दादा संग उनमें पूरी खो जाती

राजा-रानी, फिर जंगली जानवर

भूत की कहानी सुनते सो जाती

 

दादा बड़े प्यार से फिर लेते गोदी

पापा मम्मा के पास ले जा सुलाते

मैं जब थोड़ा-सा हिलती-डुलती

 वे झट अपने सीने से लगाते

 

दादा जी की कित्ती बड़ी किताबें

उनमें कितनी प्यारी-प्यारी बातें

वे मुझको खेल-खेल में पढ़ाते

लिख-पढ़ खूब बड़ी बन,समझाते

 

दादा जी सच्ची कितना थक जाते

मैं उनके पास बैठती, देती दवाई

नन्हे हाथों से सिर को सहलाकर

 प्यार से देती फिर जयपुरी रजाई

 

भगवान से तो रोज ही मैं बोलूं

 सिर पर छतरी बने रहें दादाजी

लब से निकले तो बस एक ही दुआ

रहें सदा खुश- मेरे प्यारे दादा जी!

 

  • नेताजी टावर

  • कोलकाता – 700047.

  • मो. 9434198898

  • ईमेल: rawelpushp@gmail.com

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