नवसंधान कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान-परंपरा
Shakun
8 hours ago
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‘ भारत की सारस्वत साधना’ पुस्तक पर चर्चा

नवसंधान कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान-परंपरा पर सार्थक विमर्श
कोलकाता, 22 अगस्त। श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय के तत्वावधान में शनिवार को पुस्तकालय कक्ष
में आयोजित नवसंधान प्रकल्प के अंतर्गत सुप्रसिद्ध विद्वान एवं संस्कृत-साहित्य के मर्मज्ञ आचार्य
राधावल्लभ त्रिपाठी की चर्चित कृति भारत की सारस्वत साधना' पर एक महत्वपूर्ण पुस्तक-चर्चा का
आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् के सामूहिक गायन तथा माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्पण
द्वारा किया गया।
कुमारसभा के अध्यक्ष श्री महावीर प्रसाद बजाज ने स्वागत भाषण में वक्ताओं का परिचय प्रस्तुत करते हुए
कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा को समझने के लिए ऐसी कृतियाँ अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो अतीत की
वैचारिक संपदा को वर्तमान के संदर्भों से जोड़ती हैं। इसी क्रम में पुस्तक-चर्चा और पुस्तक के महत्व पर भी
प्रकाश डाला।
भारत की सारस्वत साधना पर क्रमश: तीन पाठकीय वक्तव्य प्रस्तुत किए गये। सर्व प्रथम डॉ. कमल कुमार
ने संगोष्ठी की संचालन करते हुए कहा कि यह केवल भारतीय अतीत का परिचय देने वाली पुस्तक नहीं है,
बल्कि भारतीय मनीषा और ज्ञान-साधना को नए संदर्भों में देखने का प्रयास है। भारतीय साहित्य दर्शन,
व्याकरण, काव्यशास्त्र तथा विभिन्न ज्ञान-परंपराओं के विकास को व्यापक दृष्टि से समझने की कोशिश की
गई है।
आचार्य विनोदानंद जी ने पुस्तक के विभिन्न पक्षों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए भारतीय ज्ञान-परंपरा
की व्यापकता, उसकी निरंतरता तथा उसके विविध बौद्धिक और सांस्कृतिक आयामों की चर्चा की।
श्री अजयेन्द्रनाथ त्रिवेदी ने अपने वक्तव्य में कहा कि सारस्वत साधना का अर्थ केवल ज्ञान का संचय नहीं
बल्कि ज्ञान के प्रति निरंतर जिज्ञासा, अनुशीलन, चिंतन और सृजनशील प्रतिवद्धता है।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन किया कुमारसभा के मंत्री श्री बंशीधर शर्मा ने। इस गोष्ठी में महानगर के कई
गणमान्य साहित्यकार तथा विद्वत जन एवं साहित्यप्रेमी सम्मलित हुए।
समारोह में सर्वश्री नन्दकुमार लढ़ा, अरुण प्रकाश मल्लावत, सीताराम तिवाड़ी, रामपुकार सिंह, डॉ. अर्जुन ठाकुर,
सत्यप्रकाश राय, भागीरथ सारस्वत, मनीष जैन, वेदप्रकाश गुप्ता, मीतू कानोड़िया, श्रीमोहन तिवारी, गायत्री
बजाज एवं अरुण कुमार सिंह प्रभृति विशेष रूप से उपस्थित थे।
-बंशीधर शर्मा, मंत्री