चाणक्य अभी भी जिंदा है छिपा दिया इतिहास तुम्हारा तो क्या गीदड़ बन जाओगे बर्बरता के भय से क्या बिल में घुस जाओगे स्वाभिमान को गिरवी रख कर कैसे जी पाओगे बहु -बेटियों की लुटती इज्जत कब तक सह पाओगे। सुप्त पड़ी पौरुष ज्वाल …
Read More »बहुभाषी काव्य गोष्ठी का आयोजन
बंगीय हिन्दी परिषद् में कवि कल्प की बहुभाषी काव्य गोष्ठी कोलकाता, 13 अप्रैल 2026 कोलकाता की ऐतिहासिक संस्था बंगीय हिन्दी परिषद् में कवि कल्प की बहुभाषी काव्य गोष्ठी का आयोजन डॉ अभिज्ञात की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि सेराज खान बातिश और विशिष्ट अतिथि प्रतिभा सिंह ने अपनी गरिमामय …
Read More »अनिश्चय के भवर में युद्ध विराम
अनिश्चय के भंवर में युद्धविराम का भविष्य कुल 932 घंटे 35 मिनट यानी 40 दिनों के युद्ध में खरबों की क्षति के बाद खाड़ी में अस्थायी दो सप्ताह के संघर्ष विराम की घोषणा हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद ईरान ने भी इसे …
Read More »आया प्रथम बैसाख, नव वर्ष का उजियारा
*प्रथम बैसाख : नव वर्ष का गान आया प्रथम बैसाख, नव वर्ष का उजियारा, बंग-धरा पर फैला देखो, खुशियों का नज़ारा। ढाक की थाप गूंजे, मन हो जाता चंचल, हर आंगन में खिल उठता, ये उत्सव निर्मल। रवीन्द्र संगीत के सुनो,गूंज उठे स्वर, “एसो हे बईशाख” ने …
Read More »खालसा सिरजना दिवस में तब्दील हुआ बैसाखी पर्व
14 अप्रैल 2026/ बैसाखी पर्व विशेष खालसा सिरजना दिवस में तब्दील हुआ बैसाखी पर्व हमारे देश में दिल्ली के तख़्त पर मुगलिया सल्तनत का शासन लगभग 300 सालों का रहा है ,बाबर से लेकर औरंगजेब और फिर बहादुर शाह द्वितीय तक और सिख गुरु की परंपरा भी गुरु नानक देव …
Read More »घर आंगन की खुशबू
घर आंगन की खुशबू घर आंगन की खुशबू फिर भी दुत्कारी ऑफिस से घर , घर से बाहर ये भी जिम्मेदारी भाग दौड़ के जीवन में भूली अपनी माहवारी मेरा घर मेरा आंगन हर पल इस पर वारी। कही छल रही खुद को खुद से आधुनिकता की मारी तोड़ दिए …
Read More »झिलि मिली -आंका बांका
नाट्य समीक्षा नजरूल के बेतरतीब जीवन को तरतीब से प्रस्तुत करता नाटक: झिली मिली, आंका बांका विद्रोही कवि के नाम से प्रख्यात कवि काजी नजरूल इस्लाम के जीवन और उनकी विचारधारा तथा कुछ खास कविताओं को संजोती हुई नाट्य प्रस्तुति थी- झिली मिली आंका बांका! उसे रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय …
Read More »श्री जगन्नाथ पुरी का अक्षय पत्र
*श्री जगन्नाथ पुरी की ‘अक्षयपात्र’ कथा: कभी खत्म न होने वाले भोग का रहस्य, *इसका आध्यात्मिक महत्व* पश्चिम बंगाल हिंदी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नंदिनी साहू द्वारा रचित ‘मेडूसा’ किताब कविताओं का संग्रह है जिसमें, एक बहुत ही प्रसिद्ध कविता जगन्नाथ पुरी में अक्षय पात्र है जिसमें अक्षय पात्र …
Read More »ईरान पर भारत का रुख
ईरान पर भारत का रुख सही अमेरिकी इजरायली संयुक्त हमले और उसके विरुद्ध ईरान की सैन्य प्रतिक्रियाओं पर देश के अंदर विरोध के परिदृश्य चिंताजनक आवश्यक हैं, पर आश्चर्य का विषय नहीं। भारत में अब ऐसी स्थिति नहीं जहां किसी मुद्दे पर देश की एकता दिखाई दे …
Read More »एक पुराना मौसम लौटा (कविता संग्रह)
किताब : एक पुराना मौसम लौटा (कविता संग्रह) पुस्तक समीक्षा किताब : एक पुराना मौसम लौटा (कविता संग्रह) रचनाकार : शहरयार कीमत : 150 रुपए प्रकाशक- शिवना प्रकाशन, सम्राट कॉम्प्लैक्स बेसमेंट, बस स्टैंड के सामने, सीहोर मप्र 466001 ईमेल- shivna.prakashan@gmail.com प्रकाशन वर्ष- 2026 किसी अँधेरी सुरंग के मुहाने पर …
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