राष्ट्र की उन्नति हेतु भाषा के प्रति गौरव बोध आवश्यक –डॉ.विचित्रसेन गुप्त

कोलकाता, 21 सितम्बर। ‘भाषा के प्रति गौरव का भाव न जुड़े तो कोई भी राष्ट्र आगे नहीं बढ़ सकता है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है ग्रेट ब्रिटेन जिसने एक राष्ट्र के तौर पर अंग्रेजी को स्वीकार कर अनेक देशों पर अपना आधिपत्य जमाया। भारत की विविधता को बनाए रखने के लिए हिंदी भाषा की एकता आवश्यक है। हिंदी इस देश की मजबूरी नहीं, अनिवार्यता है।जानना, मानना और अपनाना के गुरु मंत्र से हिंदी को अपने दैनिक आचरण में आत्मसात करने की आवश्यकता है।’–ये उद्गार है विशिष्ट उप निदेशक (कार्यान्वयन), गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग के उप निदेशक (कार्यान्वयन) डॉ. विचित्रसेन गुप्त के, जो श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय द्वारा शनिवार को आयोजित हिन्दी दिवस समारोह में बतौर अध्यक्ष बोल रहे थे।
समारोह के मुख्य वक्ता महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. अमित राय ने ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हिन्दी के सम्मुख उपस्थित चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने भाषा के तकनीकी पक्ष को सुदृढ़ करने पर बल देते हुए कहा कि अनुवाद और भारतीय भाषाओं के बीच जीवंत सामंजस्य स्थापित कर ही हिन्दी को ज्ञान-विज्ञान की सशक्त भाषा बनाया जा सकता है।
समारोह के विशिष्ट अतिथि केंद्रीय हिंदी संस्थान (आगरा) के भुवनेश्वर क्षेत्रीय केंद्र के निदेशक डॉ. रंजन कुमार दास ने भारतीय भाषाओं के पारस्परिक सौहार्द और साझा सांस्कृतिक विरासत के महत्व को सामने रखा। उन्होंने सी-डैक जैसी संस्थाओं द्वारा विकसित तकनीकी टूल्स और अनुवाद के माध्यम से भाषाई सीमाओं को पाटकर राष्ट्रीय अखण्डता को मजबूत करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर हिन्दी और राष्ट्रीय अखण्डता पर आयोजित काव्य गोष्ठी में मीतू कानोड़िया, मौसमी प्रसाद, भारती मिश्रा, अमित अम्बस्ट एवं रामपुकार सिंह प्रभृति रचनाकारों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत की, जिसे उपस्थित श्रोताओं ने करतल ध्वनि से उत्साह व्यक्त किया।
समारोह में अतिथियों को मुक्तामाला पहना कर स्वागत किया सत्यप्रकाश राय, डॉ. सी. पी. सिंह (हैदराबाद), श्रीमोहन तिवारी, परमजीत पंडित, दिव्या प्रसाद एवं अरविन्द तिवारी ने। समारोह का शुभारंभ श्री रमाकांत सिन्हा की सरस्वती वंदना से हुआ। स्वागत भाषण दिया पुस्तकालय के अध्यक्ष श्री महावीर बजाज ने। कुशल संचालन किया डॉ. कमल कुमार ने तथा कल्याण मंत्र का पाठ किया श्री सत्यप्रकाश राय ने।
इस समारोह में सर्वश्री डॉ. आर. एस. मिश्र, चन्द्रकुमार जैन, डॉ. चित्रा माली, नवीन सिंह, सुशील कुमार पाण्डेय, विनोद यादव, लक्ष्मी जायसवाल, रूद्रकांत झा, पूजा प्रसाद, विवेक तिवारी, कंचन साहा, गायत्री बजाज एवं अरुण सिंह प्रभृति अनेक गणमान्य लोगों से सभागार खचाखच भरा था।
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