* जीने का विज्ञान है वेदांत –डॉ कर्ण सिंह*
कोलकाता , 28 सितंबर। भारतीय विद्या मंदिर एवं भारतीय संस्कृति संसद के संयुक्त तत्वावधान में सेठ माधोदास मूँधडा स्मृति
व्याख्यान माला के तीसरे आयोजन के अन्तर्गत रविवार को आभासी माध्यम से बीज वक्तव्य रखते हुए राजनीति के शिखर पुरुष पद्म विभूषण डॉ कर्ण सिंह जी ने कहा कि जीने का विज्ञान है वेदांत। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि सबसे पहले व्यक्ति को अपने जीवन का लक्ष्य तय करना चाहिए ।
उपनिषदों के अनुसार आत्मा ब्रह्म का प्रतिबिंब है ।मस्तिष्क में ज्ञानयोग, हृदय में भक्ति योग, बाहों में कर्म योग एवं श्वासों में राजयोग बताया गया है ।
जब हम किसी कर्म को इष्ट को समर्पित कर देते हैं तब वह कर्म योग बन जाता है ।97 वर्ष की अवस्था में आभासी माध्यम से आधे घंटे तक वेदान्त जैसे गूढ़ विषय को जिस सहजता एवं सरलता से उन्होंने प्रस्तुत किया, उसे देख एवं सुनकर सभी भावविभोर थे।
आयोजन का प्रारंभ एवं डॉ.कर्ण सिंह जी का परिचय दिया संस्था की उपाध्यक्षा डॉ तारा दूगड़ ने , स्वागत भाषण दिया संस्थाध्यक्ष डॉ विट्ठल दास मूँधडा ने । डॉ मूंधड़ा ने कहा कि महाराजा कर्ण सिंह जी ने जम्मू कश्मीर के प्रथम एवं अंतिम सदर-ए-रियासत के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं ।
धन्यवाद ज्ञापन किया संस्था के मुख्य ट्रस्टी राजगोपाल सुरेका ने ।
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