युवाओं का देशहित संकल्प ही विकसित भारत का आधार – शिव प्रकाश

कोलकाता, 4 अक्टूबर। “अमेरिका-यूरोप के जो देश खुद को विकसित कहते हैं, उन्होंने मानवता का शोषण किया है। अत: भारत को विकसित बनाना है तो युवाओं को उसे जगतगुरु बनाने वाले प्रेम एवं शांति से पूरित सौहार्द, आर्थिक रूप से संपन्न, सामरिक दृष्टि से सुरक्षित, सांस्कृतिक गौरव बोध से आप्लावित होमोजीनीयस भारत के भाव का संकल्प लेना होगा।
राजनैतिक-सामाजिक-आर्थिक प्रजातंत्र के लिए भारतीय चिन्तन आवश्यक है। युवाओं को चाहिए कि वे टेक्नोलोजी का उपयोग करते हुए नये-नये प्रयोग करें, किन्तु जीवन में देशभक्ति एवं स्वाभिमान का भाव रखते हुए आन्तरिक समस्यायें, रोजगार, सांस्कृतिक गौरव बोध एवं पर्यावरण आधारित विकास पर अपना ध्यान केन्द्रीत करें। देश के लिए मरने की नहीं, जीने की आवश्यकता है।
युवाओं को राष्ट्र विरोधी ताकतों से गुमराह नहीं होने की आवश्यकता है, अत: देशहित के लिए युवा संकल्पित हो तभी 2047 के विकसित भारत का संकल्प पूर्ण होगा।’ –ये उद्गार हैं भाजपा के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव (संगठन) एवं वरिष्ठ राजनेता *श्री शिव प्रकाश जी* के, जो आज स्थानीय ओसवाल भवन सभागार में श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय द्वारा शनिवार को ओसवाल भवन सभागार में आयोजित ग्यारहवें कर्मयोगी जुगल किशोर जैथलिया स्मृति व्याख्यानमाला में “विकसित भारत 2047 की संकल्पना में युवाओं की भूमिका’ विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे प्रखर चिंतक *प्रो. बल्देवभाई शर्मा* ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा विकसित भारत का अर्थ केवल आर्थिक तरक्की नहीं है। वास्तव में भारत आध्यात्मिक और मानवता का संदेश देने वाली धरा है। दुनिया जिस भारत को विश्व गुरु मानती रही है, उन बंधुत्व-नैतिकता और प्रेम -सेवा जैसे मूल्यों को समाहित करके ही भारत विकसित राष्ट्र बन सकता है।
श्री बल्देवभाई ने बताया कि आज के युवा को निहित राजनीतिक स्वार्थों के लिए उसको मोहरा बनाने वाली राष्ट्रविरोधी ताकतों से सतर्क रहना होगा और भारत को सहा अर्थों में जाने, माने और भारत का बने। हर अभिभावक को अपने घर में “जेन-जी’ के प्रति सजग रहना चाहिए और अपनी संपत्ति को भारतीय जीवन के संस्कार देने का प्रयास करना चाहिए।
समारोह के प्रधान अतिथि *श्री सज्जन कुमार तुल्स्यान* ने बताया कि 2047 के विकसित भारत का संकल्प तब तक पूरा नहीं होगा जब तक हमारे युवाओं में सनातन धर्म एवं परंपराओं के प्रति गौरव बोध नहीं होगा। विशिष्ट अतिथि जोड़ासांको के माननीय विधायक *श्री विजय ओझा* ने कहा कि कर्मयोगी जैथलिया जी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने अपने संपर्क में आने वाले प्रत्येक मानव को सामाजिक कार्यों के लिए प्रेरित किया है।
पुस्तकालय के अध्यक्ष श्री महावीर बजाज ने स्वागत भाषण में जुगल किशोर जैथलिया के जीवन प्रसंगों को सुनाते हुए कहा कि 1947 में हमें राजनैतिक स्वतंत्रता प्राप्त हुई है किन्तु 2047 तक हमें सामाजिक एवं आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त करनी होगी।
समारोह का प्रारंभ युवा गायक श्री रोहित शर्मा के “लक्ष्य हो ऊँचा हमारा, हम विजय के गीत गाएँ’ गीत से हुआ। कार्यक्रम का कुशल संचालन किया साहित्यमंत्री डॉ. तारा दूगड़ ने एवं कल्याण मंत्र का पाठ किया श्री सत्यप्रकाश राय ने। अतिथियों का अंगवस्त्र प्रदान कर स्वागत किया सर्वश्री महावीर प्रसाद रावत, नन्दलाल सिंघानिया, एडवोकेट अजय चौबै एवं नन्दकुमार लढा ने। मंच पर कुमारसभा के उपाध्यक्ष श्री भागीरथ चांडक, मंत्री बंशीधर शर्मा एवं विधायक श्री दीपांजन गुहा भी उपस्थित थे।
समारोह में सर्वश्री एन. के. अग्रवाल, सावरमल अग्रवाल, सांवरमल धनानिया, डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी, रामगोपाल सूंघा, नरेन्द्र कुमार डागा, सुनील सिंह, सगरमल गुप्त, मनीष जैन, मुल्तान पारीक, प्रदीप सूंठवाल, सीताराम तिवाड़ी, अजयेन्द्रनाथ त्रिवेदी, संजय रस्तोगी, डॉ. कमल कुमार, मदन बोथरा, इन्द्र नाहटा, वेदप्रकाश गुप्ता, संजय मंडल, अरुणप्रकाश मल्लावत, दयाशंकर मिश्र, रामपुकार सिंह, गुड्डन सिंह, पवन धेलिया, श्याम बांगड़, राजेश अग्रवाल लाला, महेन्द्र अग्रवाल, यादव चेनानी, विमल मल्लावत, वी. के व्यास, वृजेन्द्र पटेल, तेजबहादुर सिंह, राजाराम बिहानी, श्रीमोहन तिवारी, रामचन्द्र अग्रवाल, राजकमल बांगड़, सर्वेशर शर्मा, मनोज काकड़ा, मीकू सोनी एवं पूर्णिमा कोठारी प्रभृति विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोग बड़ी संख्या में सभागार में उपस्थित थे।
–बंशीधर शर्मा, मंत्री
The Wake News Portal & Magazine